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सड़कों पर भैंस लेकर निकले ऊर्जामंत्री...:प्रदेश में बिजली संकट, ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री सड़कों पर घुमा रहे हैं भैंस, सोशल मीडिया पर वीडियो हो रहा वायरल

ग्वालियर9 दिन पहले

प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ग्वालियर की सड़क पर भैंस घुमा रहे हैं। उनका एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सड़क पर भैंस की रस्सी पकड़कर उसे ले जा रहे हैं। लोग इस वीडियो को प्रदेश में ऊर्जा संकट से जोड़कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं।

वीडियो रविवार रात का बताया जा रहा है। इस दिन ऊर्जा मंत्री तोमर ग्वालियर लौटे हैं। उन्होंने सोमवार सुबह बहोड़ापुर में विद्युत केन्द्र का निरीक्षण भी किया, लेकिन उनका सड़कों पर भैंस ले जाना सबसे ज्यादा चर्चा में है। इस संबंध में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का पक्ष नहीं आया है।

सड़क पर भैंस के साथ ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर।
सड़क पर भैंस के साथ ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर।

30 सेकेंड का है वीडियो में यह है
सोशल मीडिया पर सामने आया ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का यह वीडियो 30 सेकेंड का है। इसमें वह एक भैंस की रस्सी अपने हाथ में थामे हुए हैं। सड़क पर अंधेरे में ट्रैफिक को हटाते हुए जा रहे हैं। उनकी सेवा में तैनात रहने वाला पुलिस बल उनके पीछे-पीछे जा रहा है। सड़क पर निकलते समय वह हंसी-ठिठौली भी करते जा रहे हैं। इससे पहले भी ऊर्जामंत्री अपने अनोखे अंदाज के लिए सोशल मीडिया पर चर्चित रहे हैं। इससे पहले सीवर में उतरकर सफाई करने, बिजली के ट्रांसफॉर्मर पर चढ़कर सफाई करने, शमशान घाट में श्रमदान करने के साथ-साथ जमीन पर बैठकर लोगों की शिकायत सुनने के उनके अंदाज के चलते वह सोशल मीडिया पर चर्चित रह चुके हैं।

धीरे-धीरे प्रदेश में बढ़ रहा है बिजली संकट
पावर प्लांटों में कोयले के देशव्यापी संकट का असर मध्यप्रदेश में भी दिखने लगा है। प्रदेश में दो दिन पहले तक की यह स्थिति थी कि सिर्फ 592 हजार टन कोयला बचा है। खरगोन में कोयला पूरी तरह समाप्त हो चुका है। गाडरवाड़ा में भी सिर्फ एक दिन का कोयला बचा है। इससे प्रदेश में बिजली संकट पैदा होगा। इसके बावजूद, ऊर्जा मंत्री का दावा है कि प्रदेश में बिजली संकट नहीं होने दिया जाएगा। मध्यप्रदेश जनरेशन कंपनी के सबसे बड़े श्री सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट में दो दिन का कोयला बचा है। प्रदेश में बिजली की डिमांड 10 हजार मेगावॉट तक पहुंच रही है। इसकी तुलना में प्रदेश में थर्मल, जल, सोलर व विंड से महज 3900 मेगावॉट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। शेष बिजली सेंट्रल पावर से ली जा रही है।

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