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  • Excise From Pa ... Producers Who Went To Work In Other Cities Due To Drought Damage Will Bring Back Latte In The Lockdown

आत्मनिर्भरता की कवायद:पान से आस...सूखे से नुकसान के कारण दूसरे शहराें में काम करने गए उत्पादक लाॅकडाउन में लाैटे, फिर से पान उगाएंगे

ग्वालियर2 महीने पहले
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  • अहमदाबाद, मुंबई और इंदौर से लौटे लोग अब पुस्तैनी काम को आगे बढ़ाएंगे

बरई गांव के मनोज चौरसिया। पहले पान की खेती करते थे लेकिन पिछले चार साल में सूखे के कारण फसल को नुकसान हुआ तो काम करने के लिए अहमदाबाद चले गए। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में वहां काम मिलना बंद हुआ तो घर लौट आए हैं। अब मनोज फिर से अपनी पहचान पान उत्पादक के रूप में बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे मानसून का इंतजार कर रहे हैं। बकौल मनोज, गांव के सूख चुके बोरवेलों में पानी आ गया है। घर के अन्य सदस्यों ने मार्च में ही नई फसल की बोवनी कर दी है। अगस्त तक पान की फसल आएगी और इस बार पानी की कमी नहीं रहेगी तो फसल अच्छी हो सकती है और शायद पिछले 4 साल में पहली बार हम पान की खेती में कुछ मुनाफा कमा जाएं।  दरअसल, ग्वालियर में पान की खेती का गढ़ घाटीगांव ब्लॉक का बरई गांव है। यहां 4 साल पहले 120 किसान पान उगाते थे, लेकिन सूखे की वजह से इनमें से सिर्फ 20 किसान ही ये खेती कर रहे हैं। पिछले एक साल में बरई में तालाब और पोखरों की गहरीकरण और चौड़ीकरण से भूजल स्तर बढ़ा है। इस कारण पान की खेती को लेकर पानी की कमी की समस्या इस बार नहीं रहेगी। खेती छोड़कर मजदूरी करने अहमदाबाद, इंदौर और मुंबई गए किसान भी घर लाैट आए हैं। 

लॉकडाउन से खेतों में ही खराब हो गई फसल
सतीश चौरसिया के मुताबिक इस बार उन्होंने 12 बिस्वा जमीन पर पान की खेती की थी, लेकिन फसल खेत में ही खराब हो गई। लॉकडाउन की वजह से पान की फसल की खरीद-फरोख्त ही नहीं हो पाई। पान के एक ढोल में करीब 200 पान के पत्ते आते हैं। उनके खेत में करीब 150 ढोल की पैदावार हुई थी। उन्हें 4 लाख रुपए का नुकसान इस लॉकडाउन की वजह से हुआ। अब इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की तरफ से कोई प्रयास नहीं हुए।

उप्र, दिल्ली और पंजाब जाते हैं पान के पत्ते
ग्वालियर में डबरा ब्लॉक का बिलौआ और घाटीगांव ब्लॉक का बरई गांव में ही पान की खेती होती है। बिलौआ में पान की खेती अब न के बराबर है। ज्यादातर किसान इस खेती को छोड़ चुके हैं, लेकिन बरई में अभी भी यह खेती जारी है। बरई में पैदा किया जाने वाला पान उत्तरप्रदेश के आगरा, बरेली, अलीगढ़, सहारानपुर, मेरठ, दिल्ली और पंजाब के अमृतसर तक जाता है।

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