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खुलासा:फर्जी आधार कार्ड तैयार किए और बेच दीं 11 हजार सिम

ग्वालियरएक महीने पहले
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  • भाेपाल के बाद ग्वालियर में सायबर सेल ने पकड़ा गिरोह
  • पकड़े गए दोनों जालसाज गुना जिले के कुंभराज के निवासी

इंटरनेट और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए फर्जी आधार कार्ड बनाकर माेबाइल फाेन कंपनी की सिम एक्टीवेट करने के बाद उसे ठगों को बेचने का गाेरखधंधा पूरे प्रदेश में हाे रहा है। भाेपाल के बाद ग्वालियर में राज्य सायबर सेल ने इस रैकेट से जुड़े दाे युवकाें काे पकड़ा है। दाेनाें युवक गुना के रहने वाले हैं और माेबाइल सिम के रिटेल काराेबारी हैं।

दोनों युवक 11 हजार सिमकार्ड उन ठगों को बेच चुके हैं, जो इंटरनेट के जरिए लाेगाें काे फंसाकर ठगी करते हैं। आशंका है कि युवकाें द्वारा बेची गईं सिम के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी की गई है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड टीम सायबर सेल के हाथ से बच निकला। उसकी तलाश की जा रही है। इस गैंग की बेची हुई सिम के जरिए ग्वालियर के एजी ऑफिस से रिटायर्ड अफसर के साथ ठगी हुई थी। इसी की पड़ताल करते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची। राज्य सायबर सेल के एसपी सुधीर अग्रवाल ने बताया कि पकड़े गए शख्स संदीप साहू (21) और रामेश्वर मीणा (25) निवासीगण कुंभराज जिला गुना अलग-अलग मोबाइल नेटवर्क कंपनियों में काम कर चुके हैं। इनसे पूछताछ में कुछ और लिंक मिले हैं। इस आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इन्होंने ठगों के कौन-कौन से गिरोह को फर्जी दस्तावेजों से एक्टिवेट की गईं सिम बेचीं।

प्रारंभिक पड़ताल में पता लगा है कि इन लोगों ने ग्वालियर, गुना, शिवपुरी के अलावा, भोपाल, दिल्ली, इंदौर, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा से ऑपरेट करने वाले ठगों को बिचौलियों के जरिए सिमकार्ड बेचे। आरोपी रामेश्वर मीणा सिमकार्ड कंपनी का डिस्ट्रिब्यूटर रह चुका है।

ऐसे होता है फर्जी दस्तावेज से जारी सिम का उपयोग
फर्जी दस्तावेज से जारी सिम का उपयोग सोशल साइट और इंटरनेट के जरिए ठगी करने वाले करते हैं। पुलिस पड़ताल करती है तो उन लोगों तक पहुंचती है, जिनके नाम से सिम जारी होती है। ऐसे में इन ठगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

ठग ने कार बेचने का सौदा कर 1.74 लाख ठगे थे, उसे सिम देने वालों तक पहुंची पुलिस
ग्वालियर के रहने वाले रिटायर्ड ऑडिटर नरेश चौकोटिया काे पुरानी कार खरीदनी थी। साेशल मीडिया पर उन्हें पुरानी कार बेचने का एक विज्ञापन दिखा। उन्होंने दिए गए नंबर पर कॉल किया तो फोन उठाने वाले ने खुद को फौजी बताया और कहा कि मेरा ट्रांसफर हो गया है इसलिए कार बेचना चाहता हूं। सौदा 1.80 लाख रुपए में तय हो गया। कथित फाैजी ने अलग-अलग किश्तों में एडवांस के रूप में 1.74 लाख रुपए जमा करा लिए। कार भेजने की बात कहकर उसने बचे हुए 6 हजार रुपए खाते में डालने के लिए कहा, लेकिन जब कार बताए दिन पर श्री चाैकाेटिया काे नहीं मिली तो उन्हें संदेह हुआ।

उन्होंने फिर से युवक से संपर्क किया तो मोबाइल बंद मिला। इसकी शिकायत उन्होंने सायबर सेल में की। एसपी सुधीर अग्रवाल ने जांच के लिए इंस्पेक्टर दीपक गुप्ता, एसआई अनिल शर्मा, शैलेंद्र राठौर, सिपाही पुष्पेंद्र यादव की टीम को लगाया। टीम ने पड़ताल की तो पता लगा कि ठगी गई रकम अलग-अलग पे वॉलेट में ट्रांसफर हुई।

जिस मोबाइल नंबर पर कॉल किया वह सिम गुना से जारी की गई थी। इसे संदीप और रामेश्वर ने चालू की थी। जिस आधार कार्ड पर सिम जारी की गई थी, उसमें सिम लेने वाला का फोटो नहीं था। पुलिस ने दोनों से पूछताछ की तो पता लगा कि फर्जी आधार कार्ड तैयार उन्हाेंने सिम चालू की थी। इन लोगों ने इसी तरह से 11 हजार सिम चालू कर बेचीं।

एक सिम 500 से 2 हजार रुपए में बेचते थे
दोनों युवक एक टेलीकॉम कंपनी में काम कर चुके हैं। अभी गुना में सिमकार्ड बेचने की दुकान चलाते हैं। एक सिम यह दोनों 500 से लेकर 2 हजार रुपए में बेचते थे। कुछ बिचौलिए इनके संपर्क में आए थे, जो पश्चिम बंगाल, बिहार और हरियाणा से ऑपरेट करने वाले ठग गिरोह से जुड़े हैं। यही बिचौलिए सिमकार्ड खरीदकर ठगों तक पहुंचाते थे। महंगी सिम इसलिए बेचते थे, क्योंकि इन लोगों को फर्जी दस्तावेज लगाकर सिम एक्टिवेट करनी पड़ती थी।

भोपाल में भी पकड़ा जा चुका है ऐसा गिरोह
भोपाल की सायबर सेल ने भी बीते रोज चार युवक पकड़े हैं। यह लोग भी फर्जी दस्तोवज से सिम जारी कर ठगों को बेचते थे।

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