पेश की मिसाल:सरकारी स्कूल के शिक्षक ने शुरू की झुग्गी क्लास, पढ़ाई के साथ स्वरोजगार की भी ट्रेनिंग

ग्वालियरएक महीने पहलेलेखक: प्रदीप बौहरे
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जरूरतमंद बच्चों को उनकी झुग्गी-झोपड़ी के पास पढ़ाते बृजेश शर्मा। - Dainik Bhaskar
जरूरतमंद बच्चों को उनकी झुग्गी-झोपड़ी के पास पढ़ाते बृजेश शर्मा।

सरकारी स्कूल के शिक्षक बृजेश शुक्ला ने कोरोना काल में झुग्गियों के बाहर बच्चों काे खेलते देखा और बच्चों से पूछा कि पढ़ते हो या नहीं, इस पर बच्चों ने कहा कि नहीं। इसके बाद इस सरकारी शिक्षक ने इन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। साइंस कॉलेज के बाहर पहली झुग्गी क्लास शुरू हुई। इन बच्चों में पहले पढ़ने की आदत डाली गई, इसके बाद डेढ़ साल में 15 झुग्गी क्लास शुरू हो चुकी हैं।

झुग्गी क्लास को आगे बढ़ाने में शुक्ला को सबसे पहले रिटायर शिक्षक ओपी दीक्षित का साथ मिला और इसके बाद ज्ञानपुंज का यह काफिला बढ़ता गया। इन क्लास में बच्चों को पढ़ाने के साथ अब स्वरोजगार के लिए ट्रेनिंग भी शुरू की गई है, जिसमें बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

यहां चल रही पाठशाला

साइंस कॉलेज, बेटी बचाओ चौराहे, सिकंदर कंपू, किशन बाग बहोड़ापुर, ट्रांसपोर्ट नगर, स्टोन पार्क, बदनापुरा, टंकी वाले हनुमान जलालपुर रोड सागर ताल, बिरला नगर, जड़ेरुआ, गोला का मंदिर, विवेकानंद नीडम पहाड़ी, सिथौली ईंट भट्टा, आनंद नगर, बल्ला का डेरा, डबरा तथा करैरा।

टीम में यह हैं शामिल

बच्चों को पढ़ाने में मनोज पांडे, वेद रतन कुलश्रेष्ठ, कपिल, प्रेरणा शर्मा, अभिषेक मुद्गल, साहिल खान, अयान खान, हरेंद्र नागर, कमल राठौर, रामहेत रजक, रमेश, बृजेश गुर्जर, रेनू, कांति आर्य, कल्पना राठौर, विक्की नागर शामिल हैं। इसके अलावा स्कूल-कॉलेज के 70 छात्र भी शामिल हैं।

बच्चों को सिखा रहे अगरबत्ती, दीपक बनाना

सरकारी स्कूल बड़ाैरी में पदस्थ शिक्षक बृजेश शुक्ला बताते हैं कि बच्चों को स्वरोजगार की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसके चलते गोबर के दीपक, मंदिरों के फूलों से अगरबत्ती, धूप बत्ती बनाना सिखा रहे हैं।