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कोरोना कर्फ्यू में व्यापारियों पर दोहरी मार:सरकार ने कराया धंधा बंद, अब बिजली बिलों में भुगतना होगा फिक्स चार्ज

ग्वालियर13 दिन पहले
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संक्रमण की दोहरी मार इस बार भी मध्यमवर्गीय व्यापारियों पर पड़ने वाली है। बढ़ते संक्रमण के कारण सरकार ने कोरोना कर्फ्यू लगा रखा है जिस वजह से मेडिकल इमरजेंसी सर्विस की दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें बंद कर दी गई हैं। लेकिन इन व्यापारियों पर बिजली कंपनी के फिक्स चार्ज का मीटर पूरी तरह घूम रहा है। फिलहाल प्रदेश में ये कर्फ्यू 7 मई तक बढ़ा दिया गया है और आगे भी इसके बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

ऐसी स्थिति में सरकार व्यापारियों से बंद कारोबार में भी बिजली बिल में फिक्स चार्ज वसूल करेगी। 15 अप्रैल से ग्वालियर के बाजार बंद हैं। लेकिन अप्रैल के जो बिल जारी होने वाले हैं उनमें बिजली कंपनी द्वारा फिक्स चार्ज लगाया जा रहा है। व्यापारी और व्यापारिक संगठन इस चार्ज को माफ करने के लिए मांग कर रहे हैं। लेकिन इसकी उम्मीद कम है क्योंकि, सरकार ने पिछले साल के लॉकडाउन के दौरान भी इस मांग की सुनवाई नहीं की थी।

हर बिल पर कम से कम 1 हजार की होगी वसूली... ज्यादा लोड वाले कारोबार बंद

  • बिजली कंपनी द्वारा काॅमर्शियल कनेक्शनों में एक किलोवाट लोड पर महीने की 20 यूनिट बिजली की कीमत (अभी की दर से 10 रुपए प्रति यूनिट) फिक्स चार्ज के तौर पर बिल में वसूलती है। जानकारों के अनुसार काॅमर्शियल कनेक्शन 5 किलोवाट से कम का नहीं होता। ऐसी स्थिति में हर बिल में कम से कम एक हजार रुपए का फिक्स चार्ज जोड़ा जाएगा। जिसे अदा न करने पर जुर्माना भी लगेगा। इस तरह, जिनके पास जितना ज्यादा लोड स्वीकृत होगा। उस व्यापारी को उतना ज्यादा फिक्स चार्ज देना होगा।
  • कोरोना कर्फ्यू के कारण 15 अप्रैल से शहर में अस्पताल और मेडिकल सर्विस से जुड़ी दुकानें ही खुल रही हैं। दूध व किराना स्टोर को सुबह थोड़ी देर के लिए अनुमति है और इनके यहां न ज्यादा बिजली की खपत होती है न ये ज्यादा लोड लेते हैं। लेकिन मॉल, कपड़ा, ज्वैलर्स, बर्तन, माेबाइल, बिजली स्टोर, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर एवं शोरूम और कई तरह के बड़े स्टोर ऐसे स्थान हैं। जहां बड़े लोड के साथ कनेक्शन लिए जाते हैं। उनका व्यापार भी बंद है और उन्हें बिजली कंपनी को फिक्स चार्ज भी बड़ी रकम में ही देना होगा।
  • विद्युत अधिनियम 2003 में प्रावधान किया गया है कि यदि किसी भी व्यापार को शासकीय/प्रशासकीय आदेश के कारण बंद रखा जाता है तो उस स्थिति में व्यापारी से फिक्स चार्ज नहीं वसूला जा सकता। लेकिन सरकार इस नियम को मानने के लिए तैयार नहीं है पिछले साल करीब 75 दिनों के लॉकडाउन में भी सरकार ने ये चार्ज काफी विरोध के बाद वसूला।

शासन स्तर पर निर्णय होता है
^फिक्स चार्ज लेने या न लेने का निर्णय शासन स्तर पर ही हाेता है। स्थानीय स्तर पर हम इस मामले में कुछ नहीं कह सकते। यदि सरकार इस पर रोक लगा देगी तो बात अलग है।
- विनोद कटारे, महाप्रबंधक/ शहर वृत्त बिजली कंपनी
ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखा है

^इस बार हमने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार की नकारात्मक छवि न बने इसलिए व्यापारियों के बिलों में उनके अधिकार के तहत बंद अवधि का फिक्स चार्ज शून्य कर देना चाहिए।
- डॉ. प्रवीण अग्रवाल, सचिव, मप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स

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