पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • Guna MP KP Said After Taking The Name Of Scindia Every Devotee Of The Nation Should Come To The Tomb Of Veerangana

सिंधिया के गढ़ में केपी की दहाड़:सिंधिया का नाम लिए बिना गुना सांसद केपी बोले-वीरांगना की समाधि पर हर राष्ट्र भक्त को आना चाहिए

ग्वालियरएक महीने पहले
सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में गुना सांसद केपी यादव ने खड़े किए कई सवाल।
  • गुना सांसद का कहना है कि लोगों की मांग है तो ग्वालियर का नाम वीरांगना के नाम पर हो सकता है

ग्वालियर वैसे तो राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है, लेकिन शुक्रवार को सिंधिया के गढ़ में गुना सांसद केपी यादव ने दहाड़ लगाई । वह एक मात्र नेता हैं, जो सिंधिया को हार का स्वाद चखा चुके हैं। बलिदान दिवस पर वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि पर श्रद्धांजलि देने आए सांसद केपी बोलें कि वीरांगना की समाधि पर हर राष्ट्रभक्त को आना चाहिए। चाहे वो कोई भी हो।

जब उनसे पूछा गया कि सिंधिया के बारे में क्या कहना है, उनको भी आना चाहिए। इस पर वह हंसते हुए बोले- यह बलिदान सभा का कार्यक्रम में राजनीति ठीक नहीं रहेगी। हां, उन्होंने शहर का नाम बदलने पर अपनी राय जरूर दी। उनका कहना है कि लोगों की इच्छा है तो वीरांगना के नाम पर शहर का नाम हो जाए तो अच्छी बात है।

राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो ही गढ़ माने जाते हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल जहां उनका वर्चस्व है। साथ ही शिवपुरी-गुना जहां वह सालों से सांसद का चुनाव जीतते आ रहे थे लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया का भ्रम तोड़ने वाले केपी यादव ने बता दिया था कि वह किसी से कम नहीं हैं। गुना सांसद केपी यादव ने सिंधिया को चुनाव में हराने के बाद पूरे देश में सुर्खियां बंटोरी थी। अब सिंधिया भी BJP नेता हैं और राज्यसभा सांसद हैं। इसके बाद भी गुना सांसद केपी यादव से उनकी दूरियां किसी से छुपी नहीं हैं। शुक्रवार को गुना सांसद केपी यादव बलिदान दिवस पर ग्वालियर आए थे। यहां उन्होंने वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि पर पहुंचकर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाग लिया।

सिंधिया का नाम लिए बिना किया हमला

  • बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि सभा के बाद सांसद केपी यादव ने कहा कि वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि पर माथा टेकने देश के हर राष्ट्र भक्त को आना चाहिए। यहां उन्होंने सिंधिया का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा उन्हीं पर था। जब सांसद यादव से पूछा गया कि सिंधिया को भी आना चाहिए, इस पर क्या कहना चाहेंगे तो उनका कहना था कि यह वीरांगना के बलिदान का कार्यक्रम है। राजनीति के लिए बहुत समय है। हां, चलते-चलते यह जरूर कह गए कि लोगों की इच्छा है तो सरकार द्वारा ग्वालियर का नाम बदलकर लक्ष्मीबाई कर दिया जाए तो अच्छी बात है। सन 1857 में सिंधिया घराने ने मदद नहीं कि थी। इसलिए वीरांगना शहीद हुई। इस पर वह बोले इतिहास पर नहीं जाना चाहता, लेकिन वीरांगना को शहीद के सम्मान का हक मिलना चाहिए। जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया है। ऐसे शहीदों को उचित पहचान मिलनी चाहिए।
खबरें और भी हैं...