निकाय चुनाव पर बड़ा फैसला:ग्वालियर हाईकोर्ट ने महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण पर लगाई रोक, कहा- रोटेशन प्रोसेस का पालन नहीं किया

ग्वालियर9 महीने पहले
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हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में युगलपीठ ने दिया फैसला। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में युगलपीठ ने दिया फैसला।
  • अप्रैल तक शासन को कोर्ट में पेश करना है जवाब
  • आरक्षण प्रक्रिया को कोर्ट में दी थी चुनौती

नगरीय निकाय चुनाव 2021 पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। निकाय चुनाव के लिए महापौर, नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्ष पदों के लिए हुए आरक्षण में रोटेशन प्रोसेस का पालन नहीं किया गया है। यह कहते हुए कोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने राज्य शासन को अप्रैल तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई अप्रैल 2021 में होगी।

याचिकाकर्ता मानवर्धन सिंह तोमर ने नगरीय निकाय चुनाव के लिए महापौर व अध्यक्ष पद के लिए हुई आरक्षण प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति शील नागू व न्यायमूर्ति आनंद पाठक की युगलपीठ ने सुनवाई की। मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी ने पैरवी करते हुए कहा, शासन द्वारा मामले में विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।

याचिकाकर्ता मानवर्धन सिंह तोमर की याचिका में कहा गया कि नगर निगम में महापौर, नगर पालिका और नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण करते समय रोटेशन पद्धति का पालन नहीं किया गया है।

जो पहले से आरक्षित थे फिर आरक्षित कर दिए

याचिकाकर्ता का कहना था, वर्ष 2014 में जो अध्यक्ष व महापौर के पद आरक्षित वर्ग के लिए थे, उन्हें फिर से आरक्षित कर दिया गया है। इससे अन्य वर्ग को अध्यक्ष के पद पर प्रतिनिधित्व से वंचित किया जा रहा है, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया, इससे पहले भी इंदरगढ नगर परिषद, दतिया नगर पालिका व डबरा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण में रोटेशन पद्धति का पालन नहीं होने पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाई जा चुकी है।

फिलहाल आरक्षण पर रोक लगाई

प्रकरण में अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी द्वारा न्यायालय को बताया गया, अभी तक किसी भी नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा नहीं की गई है। न्यायालय ने पाया कि महापौर व नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण करते समय रोटेशन पद्धति का पालन नहीं किया गया है। इसलिए आरक्षण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

मुरैना व उज्जैन के महापौर के आरक्षण को चुनौती दी थी

नगर पालिका व नगर पंचायतों में मरकोनिया सागर, दमुआ छिंदवाड़ा, डबरा ग्वालियर, गोहद भिंड, सारनी बैतुल, खुरई सागर, आमला बैतूल, चंदेरी अशोकनगर, बीना इटावा सागर, गोटेगांव नरसिंगपुर, महाराजपुर छतरपुर, नागदा उज्जैन, भिंड, हाटा दमोह, मलाजखंड बालाघाट, झाबुआ, अलीराजपुर, पाली उमरिया, बड़वानी, बिजुरी अनूपपुर, तारिचरकलान टीकमगढ़, निवाड़ी, गोरमी भिंड, पलेरा टीकमगढ़, मकदोन उज्जैन, बरिगर छतरपुर, पवई पन्नाा, जैतवारा सतना, काकरहाटि पन्नाा, लिधोराखास टीकमगढ़, बमौर मुरैना, सांची रायसेन, खेतिया बड़वानी, जवार सीहोर, चांदला छतरपुर, बिरसिंगपुर सतना, लवकुश छतरपुर, पिपलावन देवास, बडोनी दतिया, खरगपुर टीकमगढ़, कोठी सतना, प्रथ्वीपुर निवाड़ी, सलिचोका नरसिंगपुर, इंदरगढ़ दतिया, सुवसरा मंदसौर, पटेरा दमोह, उचेहरा सतिना, साढोरा अशोकनगर, बड़ागांव टीकमगढ़,करही खरगोन, शाहगढ़ सागर, हथोड इंदौर, छपिहेडा राजगढ, बंडा सागर, मचलपुर राजगढ़, अमानगंज पन्नाा, बडकही छिंदवाड़ा, बदरवास शिवपुरी, गडमल्हारा छतरपुर, दबोह भिंड, मांडव धार, दही धार, अमरकंटक अनूपपुर, मेघनगर झाबुआ, निवास मंडला, अल्सुद बड़वानी, धमनोद रतलाम, सरदारपुर धार, ओमकारेश्वर खंडवा, भूआ बिछिया मंडला, थंडला झाबुआ, जोबट अलीराज पुर, रानापुर झाबुआ, बेहर बालाघर, कांताफोड देवास, नौरोजाबाद उमरिया, कुशी धारा, डिंढोरी, चंदिया उमरिया के आरक्षण को चुनौती दी गई थी।

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