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कोरोना टीकाकरण:हेल्थ-फ्रंटलाइन वर्कर्स दूसरा डोज लगवाने में पीछे, 18+ की आबादी 10 लाख से ज्यादा, लेकिन उनके लिए स्लाॅट नहीं

ग्वालियरएक महीने पहले
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वैक्सीन लगवाने पहुंचे युवा पास में खड़े हुए। - Dainik Bhaskar
वैक्सीन लगवाने पहुंचे युवा पास में खड़े हुए।

वैक्सीन लगाने के मामले में सरकार ने हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को बुजुर्गों से भी पहले प्राथमिकता दी। नतीजा- पहला डोज लगवाने में कोरोना योद्धाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, लेकिन दूसरा डोज लगवाने में हेल्थ व फ्रंटलाइनवर्कर्स में ज्यादा उत्साह नहीं है।

दूसरी ओर हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार शहर की कुल आबादी ( 22 लाख ) में 10 लाख 79, 276 लाेग 18 से 44 आयु-वर्ग के हैं, लेकिन रोज सिर्फ 100 को स्लॉट मिल रहा है। जीआरएमसी में इस आयु के 95 लोगों ने पहला डोज लगवाया। अन्य 11090 लोगों को टीका लगाना था, लेकिन पहुंचे 5037। इसमें 1617 ने पहला और 3295 ने दूसरा डोज लगाया।

दोनों डोज जरूरी हैं

वैक्सीन के दोनों डोज लगवाना जरूरी हैं। दूसरा डोज लगाने में देरी करने से वैक्सीन पूरी तरह से आपकी सुरक्षा नहीं कर पाती। जब हमें पहला डोज लगता है, तो उससे हमारा रोग प्रतिरोधक तंत्र सक्रिय होता है। इस दौरान हमारे शरीर में कुछ मात्रा में एंटीबॉडीज बनती हैं। दूसरा डोज लगने के बाद शरीर में तेजी से एंटीबॉडीज बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। दूसरा डोज लगने के 14 दिन आप स्वयं को कोरोना से सुरक्षित मान सकते हैं।
- डॉ. चंद्रकांत लहारिया, नेशनल ऑफीसर (हेल्थ), डब्ल्यूएचओ

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