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स्टेट फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का होना जरूरी:हाई कोर्ट ने सरकार को स्टेट फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी स्थापित करने की फिर दी सलाह

ग्वालियरएक महीने पहले
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मप्र हाई कोर्ट की ग्वालियर । - Dainik Bhaskar
मप्र हाई कोर्ट की ग्वालियर ।
  • जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा- सागर लैब पर काम का बोझ

मप्र हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने प्रदेश सरकार को स्टेट फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना करने की सलाह दी। दुष्कर्म के आरोपी की जमानत के मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद पाठक ने कहा कि सागर स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में काम का बोझ बहुत ज्यादा है। इस कारण डीएनए सहित अन्य रिपोर्ट समय पर नहीं आ पाती। इसके लिए पुलिस, सरकारी वकील व अन्य को इस तरह के मामलों में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। इसके लिए स्टेट फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का होना बहुत जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 22 जनवरी और 15 अक्टूबर 2020 को भी कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस तरह का सुझाव दिया था। राज्य शासन की ओर से इस सुझाव पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके चलते कोर्ट ने तीसरी बार ये सुझाव दिया है। कोर्ट ने आदेश की कॉपी मप्र के मुख्य सचिव, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव और प्रदेश के महाधिवक्ता को देने का भी निर्देश दिया है। दरअसल, दुष्कर्म के आरोपी भरत जाटव की ओर से हाई कोर्ट में चौथी बार जमानत की गुहार लगाते हुए याचिका दायर की गई है। आरोपी 21 अगस्त 2019 से जेल में बंद है। मामला पुलिस थाना बदरवास, जिला शिवपुरी का है।

हाई कोर्ट ने स्टेट फॉरेंसिक साइंस...

कोर्ट को बताया गया कि डीएनए जांच के लिए सैंपल तीन माह पूर्व ही भेजे जा चुके हैं, जबकि परिणाम अभी तक नहीं आए हैं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि काम की अधिकता के कारण सागर स्थित लैब से परिणाम आने में अभी और समय लगेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने राज्य शासन को स्टेट फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना करने का सुझाव दिया, ताकि रिपोर्ट में देरी होने के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय मिलने में देरी ना हो। जितनी जल्दी जांच रिपोर्ट मिलेगी, उतनी जल्दी लंबित प्रकरणों की संख्या में भी कमी आएगी।

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