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रिश्ते पर कोर्ट की मंजूरी:हाईकोर्ट ने प्रेमी-प्रेमिका को दी लिव इन की इजाजत, लेकिन प्रेमी को हर 7वें दिन देनी हाेगी सुखी रहने की रिपोर्ट

ग्वालियरएक वर्ष पहले
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लिव-इन रिलेशन में रह रहे युवक-युवती काे हाईकाेर्ट की ग्वालियर बेंच ने साथ रहने की इजाजत दे दी है। - Dainik Bhaskar
लिव-इन रिलेशन में रह रहे युवक-युवती काे हाईकाेर्ट की ग्वालियर बेंच ने साथ रहने की इजाजत दे दी है।
  • परिजनों के खिलाफ जाकर युवती ने हाईकोर्ट में कहा-मैं हूं बालिग, युवक के साथ रहूंगी

लिव-इन रिलेशन में रह रहे युवक-युवती काे हाईकाेर्ट की ग्वालियर बेंच ने साथ रहने की इजाजत दे दी है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि युवक और युवती बालिग हैं और आपसी सहमति से साथ रहना चाहते हैं, ताे रह सकते हैं।

उन्हें ऐसा करने से नहीं राेका जा सकता है। काेर्ट ने दाेनाें काे साथ-साथ रहने की इजाजत के साथ यह शर्त भी जाेड़ी है कि प्रेमी जाेड़ा की हाईकाेर्ट की निगरानी में रहेगा। युवक काे इस बात का शपथ पत्र भी देना हाेगा कि वह युवती काे सुखी रखेगा।

काेर्ट में मुरैना के रहने वाले वीरसिंह ने हैवियस कार्पस दायर की थी। इससे उसने कहा मैं और संध्या साथ-साथ रह रहे थे। लेकिन संध्या के घरवालाें काे इस पर आपत्ति है, इसलिए उन्हाेंने उसे अवैध रूप से अपने कब्जे में कर लिया है। लिहाजा उसे उऩके चंगुल से मुक्त कराया जाए। संध्या एक महीने से मुरैना के सुधारगृह में थी।

हाईकोर्ट करेगा निगरानी

पैरालीगल वॉलिंटियर्स की तैनाती लीगल ऐड सर्विस द्वारा की जाएगी। जो कि हर 7 दिन में वीरसिंह एवं संध्या के पास पहुंचेंगे और उनकी स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट को हर महीने हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर बताया जाएगा कि संध्या इस लिव-इन रिलेशनशिप में सही से रह रही है या नहीं।