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  • Historians Are Examining The Evidence, Records And Documents On Every Criterion Regarding The Caste Of The Emperor, Attention Is Also Being Paid To The Granular Evidence

सम्राट मिहिर भोज जाति विवाद...:सम्राट की जाति को लेकर साक्ष्य,अभिलेश और दस्तावेजों को हर कसौटी पर जांच रहे इतिहासकार, बारीक से बारीक सबूत का भी रखा जा रहा ध्यान

ग्वालियर15 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • - बुधवार को जांच कमेटी की बैठक हुई, कोई कुछ बताने को तैयार नहीं

ग्वालियर में सम्राट मिहिर भोज की जाति को लेकर अभी तक आए साक्ष्य, अभिलेख और दस्तावेजों को जांच कमेटी ने हर कसौटी पर कसा है। जांच कमेटी में शामिल इतिहासकार छोटे-छोटे साक्ष्य पर भी पूरी गंभीरता से मंथन कर रहे हैं। बुधवार को जांच कमेटी की बैठक हुई है। जिसमें अभी तक आए सबूतों को देखा गया है।

साथ ही इतिहास कारों ने इंटरनेट से लेकर चर्चित इतिहासकारों की किताबों से भी साक्ष्यों का मेल किया है। जांच कमेटी की बैठक में क्या हुआ और कितने सदस्य बैठक में शामिल थे कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। बैठक में जो भी हुआ वह सीधे हाईकोर्ट को ही बताया जाएगा। पर अभी जांच कमेटी की एक से दो बैठक और होंगी। उसके बाद ही समिति अंतिम निर्णय पर पहुंचेगी और अपनी रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपेगी।
यह है मिहिर भोज पर पूरा विवाद
- 8 सितंबर को नगर निगम ग्वालियर ने शीतला माता मंदिर रोड चिरवाई नाका पर सम्राट मिहिर भोज महान की प्रतिमा का अनावरण किया था। अपने अनावरण के साथ ही सम्राट मिहिर भोज पर विवाद शुरू हो गया है। नगर निगम ने प्रतिमा स्थापना के ठहराव प्रस्ताव लाते समय साफ उल्लेख किया था कि सम्राट मिहिर भोज नाम से प्रतिमा लगाई जाएगी, लेकिन जब प्रतिमा का अनावरण किया गया तो सम्राट मिहिर भोज के आगे गुर्जर सम्राट मिहिर भोज लिखा गया था। उनको गुर्जर सम्राट लिखने के साथ ही विवाद शुरू हो गया। इसको लेकर क्षत्रिय महासभा और आखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने सम्राट को लेकर अपने-अपने दावे पेश किए। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का तर्क है कि सम्राट मिहिर भोज महान राजपूत क्षत्रिय हैं। इसके संबंध में उन्होंने इतिहास कारों के लेख, शिलालेख व परिहार वंश के सबूत भी रखे हैं तो इसके जवाब में अखिर भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने भी तर्क रखा है और इतिहास में उन्हें गुर्जर सम्राट बताते हुए सबूत रखे हैं। पर यहां तक बात नहीं रही।

इसके बाद शहर में सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक उपद्रव हुआ। यह उपद्रव ग्वालियर तक ही नहीं रहा पड़ोसी शहर मुरैना, भिंड व उत्तर प्रदेश के शहरों तक भी पहुंच गया। कानून व्यवस्था बिगड़ने पर एक सामान्य नागरिक ने मामले को हाईकोर्ट में जनहित याचिका में पेश किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने एक जांच कमेटी सभांग आयुक्त की अध्यक्षता व आईजी ग्वालियर जोन की उपाध्यक्षता में बनाई। इसमें संबंधित क्षेत्र के SDM, दो हिस्ट्री के प्रोफेसर भी शामिल रहे हैं।
अभी तक 250 से ज्यादा साक्ष्य, अभिलेख व दस्तावेज आ चुके हैं
- जांच कमेटी बनने के बाद 5 अक्टूबर शाम 5 बजे तक तक गुर्जर, राजपूत क्षत्रिय सहित अन्य सभी नागरिकों को सम्राट के संबंध में जो भी दस्तावेज हैं उनको रखने का समय दिया था। अभी तक जांच कमेटी के पास 250 से ज्यादा साक्ष्य, दस्तावेज व अभिलेख के प्रमाण पहुंच चुके थे। अब कोई दस्तावेज व साक्ष्य पब्लिक से नहीं लिया जाएगा। इतना ही नहीं नगर निगम की जांच कमेटी से भी मूर्ति स्थापना से संबंधित रिपोर्ट को सुरक्षित रख लिया गया है। बुधवार को हुई बैठक में इन्हीं साक्ष्य, अभिलेख व दस्तावेजों की समीक्षा की गई। अब इतिहास के जानकार सभी साक्ष्यों का अवलोकन कर उनका हिस्ट्री से मिलान कर रहे हैं। इसके बाद 13 अक्टूबर को भी कमेटी की बैठक होनी है।

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