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खतरा फिर बढ़ा:6 जिलों में 10 हजार से ज्यादा परिवारों की गृहस्थी मलबे में दबी, सिंध में उफान से शिवपुरी में फिर बाढ़ के हालात

ग्वालियर-चंबल4 महीने पहले
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शिवपुरी। बैराड़ के ऐचवाड़ा गांव में घर तबाह होने के बाद सामान ढंूढ़ता युवक। - Dainik Bhaskar
शिवपुरी। बैराड़ के ऐचवाड़ा गांव में घर तबाह होने के बाद सामान ढंूढ़ता युवक।
  • शिवपुरी, दतिया, भिंड और भितरवार-डबरा में बाढ़ का अलर्ट, सीएम की मृतकों के परिजनाें को 4-4 लाख की सहायता की घोषणा
  • संभाग में बाढ़ के कारण 21 मौतें, सबसे ज्यादा 11 शिवपुरी में; एक लाख 35 हजार हेक्टेयर में फसल का प्रारंभिक नुकसान

सिंध, पार्वती, कूनो और चंबल नदी में उफान से आई बाढ़ ने ग्वालियर-चंबल संभाग के श्योपुर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना और ग्वालियर जिलों में तबाही ला दी है। इन जिलों में अब भी जिंदगी पटरी पर नहीं आ पाई है। शुक्रवार को गुना जिले में भारी बारिश के कारण शिवपुरी जिले में सिंध नदी और कूनो नदी फिर उफान पर आ गई। शिवपुरी जिले के कोलारस में पचावली पुल फिर से डूब गया है। मड़ीखेड़ा बांध से पानी लगातार छोड़ा जा रहा है।

शिवपुरी, दतिया, भिंड और डबरा-भितरवार के सिंध नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने अलर्ट जारी करा दिया है। सेसईपुरा पर कूनो नदी में उफान आने पर शिवपुरी-श्योपुर और ग्वालियर-श्योपुर मार्ग फिर बंद हो गया। शिवपुरी जिले में बाढ़ की आशंका को देखते हुए सेना को फिलहाल रोक लिया गया है।

शिवपुरी, भिंड, श्योपुर, दतिया, ग्वालियर के डबरा-भितरवार और मुरैना में एक दिन पहले ही सभी फंसे लोगों को निकाल लिया गया है। इन छह जिलों में दस हजार परिवार बाढ़ से मकान टूटने से बेघर हुए हैं। संभाग के छह जिलों में एक लाख 35 हजार हेक्टेयर में फसल का प्रारंभिक नुकसान का अनुमान है। इसमें सबसे ज्यादा श्योपुर में 60 हजार और शिवपुरी में 50 हजार हेक्टेयर में फसल नष्ट हुई है। सभी जिलों में सर्वे दल का गठन कर दिया गया है।

शुक्रवार को सिंध नदी पर बना भिंड जिले के जखमौली का पुल भी टूट गया। इस पुल के ऊपर से दो दिन से पांच से छह फीट पानी चल रहा था। अब तक संभाग के दतिया, भिंड, शिवपुरी, श्योपुर में छह पुल टूट चुके हैं। सबसे ज्यादा दतिया में तीन और भिंड में 2 पुल टूटे हैं। संभाग में अब तक बाढ़ से 21 मौतें हो चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा 11 मौतें शिवपुरी में और पांच मौतें श्योपुर में हुई। दो मौतें मुरैना और 3 माैतें डबरा-भितरवार में भी हुई हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रविवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वहीं पूर्व सीएम कमलनाथ शनिवार को शिवपुरी व श्योपुर में बाढ़ प्रभावितों के बीच जाएंगे।

बाढ़ से घर-गृहस्थी मलबे में दबी, भीगा अनाज सड़ांध मार रहा, अब खाने-पीने का भी संकट

दशरथ परिहार. शिवपुरी| शिवपुरी जिले की बैराड़ तहसील से 90 किमी दूर पार्वती नदी किनारे बसे रायपुरा गांव में बाढ़ के बाद हर तरफ तबाही दिख रही है। करीब डेढ़ सौ घरों वाले रायपुरा में पार्वती नदी के सैलाब में करीब पचास कच्चे-पक्के मकान ढह गए। कई परिवारों के सिर से छत छिन गई ताे कई की गृहस्थी मलबे में दब गई। जो सामान बच भी गया वो उपयोग के लायक नहीं बचा। पानी से गेहूं-चना सड़कर बदबू मार रहा है। अब परिवारों के सामने खाने-पीने का भी संकट खड़ा हो गया है।

शुक्रवार की दोपहर दैनिक भास्कर की टीम जमीनी हकीकत जानने पहुंची तो लोग अपना दर्द बयां करते-करते रो पड़े। रायपुर गांव के राजाराम अपनी कच्ची पाटौर दिखाते हुए बोले कि जब गांव लौटे तो रात 2 बजे यह आंखों के सामने ढह गई। कूलर, टीवी, कपड़े, बर्तन, खाने-पीने का सामान मलबे में दब गया। गनीमत रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, हम लोग गृहस्थी ढूंढने में लगे थे।

घर में चार-पांच बोरा गेहूं था, वह भी चार-पांच दिन से भीगने के कारण सड़ गया है। अब बदबू मार रहा है। इसे फेंक भी नहीं सकते क्योंकि यदि इसे हटा दिया तो कुछ दिन बाद सर्वे वाले आएंगे, वे पूछंेगे कि क्या-क्या खराब हुआ तो क्या बताएंगे। वे बिना दिखाएं मानेंगे नहीं, इसलिए इस बदबूदार गेहूं को घर में ही रखना मजबूरी होगी।

कुछ इसी तरह की मजबूरी गांव की वृंदा शाक्य और उनकी बहू रेखा शाक्य ने बयां की। वे बताती हैं कि आधी रात को घर के भीतर बाढ़ का पानी भरा तो बगैर सीढ़ियों वाले मकान की छत पर रस्सी के सहारे बच्चों को लेकर चढ़े। तिरपाल ओढ़कर छत पर दो दिन और दो रातें बितानी पड़ीं। बच्चे भूख से बिलखते रहे। चारों तरफ पानी के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा था। बाढ़ उतरने के बाद दामाद कहीं से आटा लाए और खाना बन पाया।

वृंदा बाई अपने आंसू पौंछते हुए कहती हैं कि भूख-प्यास से तीनों नाती बीमार हो गए, इलाज कराने भी नहीं ले जा पा रहे। रायपुर गांव के राकेश धाकड़ ने घर के पास लोहे के पाइप व जाली लगाकर 350 क्विंटल प्याज भरकर रखी थी। लेकिन नदी की बाढ़ में सारी प्याज बह गई। पांच फीट पानी होने से घर के अंदर रखी प्याज भी भीग गई। हालांकि परिवार ने ऊंचे स्थान पर पहुंचकर जान बचा ली।

मकान ढहे, अनाज और गृहस्थी के साथ फसल भी बहा ले गई बाढ़, खेतों में आ गए पत्थर-रेत

अजयगढ़ गांव में बाढ़ की वजह से 22 घरों को नुकसान हुआ है। अब खाने का संकट है।
अजयगढ़ गांव में बाढ़ की वजह से 22 घरों को नुकसान हुआ है। अब खाने का संकट है।

कौशल मुदगल.ग्वालियर| शहर से करीब 55 किलो मीटर दूर से डबरा-पिछोर में सिंध नदी के उफान की भयावह तस्वीर दिखती है। मंगलवार काे उत्पन्न बाढ़ की इस स्थिति के बाद जिंदगी बचाने के लिए घर छाेड़कर सुरक्षित ठिकानाें पर भागे लाेग बाढ़ का पानी उतरने पर बुधवार काे जब वापस गांवाें में अपने घर की ओर लाैटे ताे वहां के हालात देखकर उनकी आंखाें में आंसू आैर चेहरे पर बर्बादी का दर्द था। क्योंकि, मकानों में बड़ा नुकसान तो हुआ ही, साथ ही राशन-कपड़े सहित ज्यादातर सामान बहकर चला गया। बाढ़ से खेतों में खड़ी फसल के साथ उसकी मिट्‌टी तक बह गई और अब पत्थर आ गए हैं।

पिछोर से सटे सिलेटा-सिली गांव के गणेश बाथम कहते है कि बाढ़ का पानी जैसे-जैसे गांव से हट रहा है, घरों को देखा नही जा रहा। जिगनिया-सिलेटा गांव में 28 मकान क्षतिग्रस्त हुए है। कोई जनहानि तो नहीं हुई लेकिन गाय, भैस, बकरी अब घरों में नहीं है। चार दिनों बाद भी इनका कोई पता नहीं पड़ रहा है। कमरे में गाद जम गई है, ऐसे में घर का सामान कीचड़ में खोजना पड़ रहा है। वहीं अजयगढ़ के सुरेश बघेल बताते हैं कि गांव में 22 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

वे कहते हैं कि पानी में गृहस्थी का सामान खत्म हो गया है। खाने की परेशानी हो रही है। हम लोगों के यहां का राशन, कपड़े, अलमारी तक बह गई। अलमारी और कुछ बड़ा सामान थोड़ी दूरी पर मिल जरूर गया, लेकिन वाे पूरी तरह नष्ट हो चुका है। दो दिन से अधिकारियों को फाेन करके समस्या बता रहे हैं, लेकिन रहने की व्यवस्था नहीं हो पा रही, इधर-उधर रहकर दिनरात का वक्त गुजार रहे हैं।

सिंध किनारे के ये गांव बाढ़ से हुए बेहाल: बीजकपुर, भैंसनारी, लडैयापुरा, अजयगढ़, बाबूपुर, कैथोदा, सिली, सिलेटा, लिधौरा, गजापुर, जिगनियां, विर्राट, देवालय, चांदपुर, रायपुर, मगरौरा, कंचनपुरा, लोहागढ़, बैजनाथ का डेरा, इमला का डेरा, घन्ना का डेरा, धर्मपुरा, बारखेड़ी।

बाढ़ से दो दिन में आठ हजार करोड़ का नुकसान, 23 मौतें
भोपाल|
सात जिलों में दो दिन की बारिश 8 हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान दे गई। भारी वर्षा और बाढ़ से 23 मौतें, 24 हजार पक्के-कच्चे मकानों काे नुकसान और 30 हजार हैक्टेयर की फसल को सीधे तौर पर क्षति पहुंची है। राज्य सरकार ने इसको देखते हुए शुक्रवार को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि जल्द से जल्द केंद्रीय दल भेजकर प्रारंभिक क्षति का आंकलन कराएं, ताकि विशेष राहत पैकेज की राशि मिल सके।

शिवराज बोले- मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता : मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री अमित शाह को हालत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त मकानों को बनाने के लिए पीएम आवास से 1 लाख 20 हजार रुपए दिए जाएंगे। परिवार के सदस्य की मौत पर 4 लाख रुपए दिए जाएंगे।

आज श्योपुर-गुना में रेड, भिंड मुरैना, शिवपुरी मंे ऑरेंज अलर्ट
ग्वालियर|
टीकमगढ़, सागर, दमोह के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। ऐसे में शनिवार के लिए श्योपुर, गुना और अशोकनगर जिले में रेड अलर्ट है। जबकि मुरैना, भिंड और शिवपुरी जिले में ऑरेंज अलर्ट है।
-वेद प्रकाश सिंह, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक

प्रभारी मंत्री को ग्रामीणों ने घेरा, बोले- हमारे घर में कुछ नहीं बचा, खाना ही दिलवा दो...
श्योपुर| प्रभारी मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने शुक्रवार को दोपहर 2 बजे तक प्रशासन के साथ बैठक की। इसके बाद वे आवदा डैम का निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण कर लौटते वक्त रास्ते में 5 जगह ग्रामीणों ने उन्हें घेरा। ग्रामीणों ने कहा- बाढ़ में हमारा सब कुछ खत्म हो चुका है। बीते 3 दिनों से हम भुखमरी झेल रहे हैं। प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली, आप हमें खाना ही दिला दो।

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