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  • If The Wife Got Fever, The Other Members Did Not Have Any Symptoms, Even After The Investigation; As Soon As The Report Came Positive, Fever And Bad Luck Engulfed The House And Beat Corona.

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:पत्नी को बुखार आया तो अन्य सदस्यों ने लक्षण नहीं होने के बाद भी कराई जांच; रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही बुखार-बदनदर्द ने घेरा, घर पर रहकर कोरोना को दी मात

ग्वालियर6 महीने पहले
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अमित जैन | कोरोना वॉरियर  - Dainik Bhaskar
अमित जैन | कोरोना वॉरियर 
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से इसे हराने वालों की जांबाज कहानियां, पढ़िए आज चौथी कड़ी

कोरोना काल में मेरा किचन से जुड़े सामान का कारोबार ऑनलाइन ही चल रहा था। न कोई घर से बाहर जा रहा था और न ही बाहर से किसी को अंदर आने दिया। 3 अप्रैल को पत्नी एकता जैन ने बुखार की शिकायत की। दवा लेने के बाद भी आराम नहीं मिला तो चार अप्रैल को पत्नी के साथ मैंने, बेटे सम्यक, बेटी तनीशा और भांजे ऋषभ ने जांच कराई। पत्नी के अलावा किसी को कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन रिपोर्ट सभी की पॉजिटिव आई।

रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 12 घंटे के भीतर मुझे और तीनों बच्चों को भी बुखार ने जकड़ लिया। डॉक्टर से बात कर सभी ने दवाई शुरू दी। बच्चों को तो अगले दिन से बुखार में आराम मिलना शुरू हो गया लेकिन मुझे और पत्नी को बुखार ने बुरी तोड़ कर रख दिया। पत्नी के काम नहीं करने की स्थिति में भाभी ने हमारे यहां भोजन पहुंचाने का जिम्मा संभाला। सबसे बड़ी समस्या सुबह की चाय की रहती थी। मैंने और पत्नी ने तय किया कि सुबह जिसका बुखार कम होगा, वह चाय बनाएगा।

कभी मैं चाय बनाता तो कभी पत्नी। डॉक्टर्स को जब लगातार बुखार की समस्या बताई तो उन्होंने कहा कि इस बार वायरस के व्यवहार में परिवर्तन आया है। इसमें लोगों को 10 से 14 दिन तक बुखार रहता है। पत्नी एकता ने कहा कि यदि ऐसे ही बिस्तर पर लेटे रहेंगे तो बीमारी और जकड़ लेगी। 9 अप्रैल से हम दोनों ने सुबह जल्दी उठकर छत पर वॉक करना शुरू किया। 30 मिनट की वॉक के बाद हम पंद्रह मिनट योगा करते। इसमें भी विशेष रूप से भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास किया।

हमने धीरे-धीरे वॉक की अवधि 45 मिनट और योगा की अवधि 30 मिनट कर दी। इससे बहुत आराम मिला। 14 अप्रैल को फिर से जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। लेकिन हम निराश नहीं हुए क्योंकि बच्चों में कोई लक्षण नहीं थे और मुझे व पत्नी को भी मामूली खांसी और बदन दर्द की शिकायत थी। इस आपदा को हमारे परिवार ने अवसर में बदला। सुबह योगा के बाद बेटा सम्यक और भांजा ऋषभ मेरे साथ क्रिकेट खेलने आ जाते।

दोपहर में हम लोग कैरम खेलते थे। मैंने छत पर पौधे भी लगाए। अब नियमित उनकी देखरेख कर रहा हूं। 24 अप्रैल को फिर सैंपल कराया, जिसमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। इस तरह हमने घर पर ही रहकर कोरोना को मात दे दी। अभी लॉकडाउन है, इसलिए हमारी दिनचर्या पहले जैसी ही है। बच्चे जरूर ऑनलाइन क्लास में व्यस्त रहते हैं और मैं दर्शन शास्त्र की किताबें पढ़कर अपने शौक पूरा कर रहा हूं।

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