पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • In IITTM, Spread Over 20 Acres, 80,000 Square Feet Of Roof Water Harvesting, 60 Million Liters Of Rain Water Will Be Released Every Year.

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

पीएम का कैच द रेन अभियान:20 एकड़ में फैले आईआईटीटीएम में 80 हजार वर्गफीट में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, हर साल 60 लाख लीटर बारिश का पानी जमीन में उतारेंगे

ग्वालियर11 दिन पहलेलेखक: इमरोज खान
  • कॉपी लिंक
प्रोजेक्ट को केंद्रीय भू-जल बोर्ड से मिली मंजूरी, 15 अप्रैल तक पूरा हो जाएगा काम । - Dainik Bhaskar
प्रोजेक्ट को केंद्रीय भू-जल बोर्ड से मिली मंजूरी, 15 अप्रैल तक पूरा हो जाएगा काम ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए कैच द रेन अभियान से शहर का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट (आईआईटीटीएम) भी जुड़ गया है। 20 एकड़ में फैले संस्थान में करीब 80 हजार स्क्वायर फीट के एरिया में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग की जा रही है। मार्च में यह काम शुरू हुआ था और 15 अप्रैल तक यह पूरा हो जाएगा। रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को सीधे संस्थान के 6 बोरवेल से जोड़ा गया है। इसके माध्यम से बारिश का पानी संरक्षित किया जाएगा। ग्वालियर में हर साल जितनी बारिश होती है।

उसके हिसाब से हर साल 60 से 65 लाख लीटर बारिश का पानी संरक्षित करने का अनुमान लगाया गया है। इसके दो फायदे होंगे। पहला यह कि सूख चुके बोरवेल दोबारा रीचार्ज होंगे और दूसरा फायदा यह होगा कि संस्थान और उसके आसपास का जमीनी जलस्तर भी बढ़ सकेगा। संस्थान में जिस तकनीक का इस्तेमाल इसमें हो रहा है, उसका प्रजेंटेशन सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के सामने हो चुका है और वहां से इसकी मंजूरी मिल चुकी है।
ऐसे संरक्षित हाेगा 60 लाख लीटर पानी
संस्थान में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग कर रहे एक्सपर्ट पंकज तिवारी के अनुसार 1 स्क्वायर फीट में एक इंच बारिश से 2.46 लीटर बारिश का पानी संरक्षित किया जा सकता है। ग्वालियर में हर साल 30 इंच के आसपास बारिश होती है। अगर 30 इंच बारिश के हिसाब से 80 हजार स्क्वायर फीट एरिया और 2.46 लीटर पानी को गुणा करें तो हर साल 59 लाख 3 हजार लीटर बारिश का पानी संरक्षित किया जा सकेगा। अगर बारिश 30 इंच से अधिक होती है तो बारिश का पानी भी अधिक संरक्षित होगा।
फैक्ट फाइल

  • 15 से 20 लाख आएगा रूफ वाटर हार्वेस्टिंग का खर्च।
  • 15 अप्रैल तक हो जाएगा रूफ वाटर हार्वेस्टिंग का काम पूरा।
  • हर साल केवल पाइप में लगे फिल्टर बदलना होंगे। इसके अलावा कुछ भी खर्च नहीं होगा।
  • 600 लोगों के हिसाब से हर साल 2 लाख 73 हजार लीटर पानी की जरूरत होती है।
  • 60 से 65 लाख लीटर पानी इसके जरिए ही संस्थान को मिल सकेगा।

एलडीपी तकनीक से फिल्टर होगा पानी
एक्सपर्ट ने बताया कि रूफ वाटर हार्वेस्टिंग में लो डेंसिटी पॉलीथेलीन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। प्राचीन काल में जिस तरह लोग मटकों के टुकड़े और कोयले से पानी फिल्टर करते थे। ठीक उसी तरह पाइप से बोरवेल में जाने वाला पानी भी फिल्टर होगा। एक्सपर्ट के अनुसार साधारण कोयले में भी 10 प्रतिशत से अधिक एक्टिव कार्बन होता है। इस तरह बारिश का पानी फिल्टर होकर बोरवेल में पहुंचेगा।

हमारा प्रयास अधिक पानी बचाने का है
सैंपल के तौर संस्थान के 10 हजार स्क्वायर फीट के सभागार में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग करवाई गई थी। कैच द रेन अभियान से जुड़ते हुए अब यह पूरे परिसर में करवाई जा रही है। इससे हम बड़ी मात्रा में बारिश का पानी संरक्षित कर सकेंगे। - प्रो. आलोक शर्मा, डायरेक्टर आईआईटीटीएम

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव - आपका संतुलित तथा सकारात्मक व्यवहार आपको किसी भी शुभ-अशुभ स्थिति में उचित सामंजस्य बनाकर रखने में मदद करेगा। स्थान परिवर्तन संबंधी योजनाओं को मूर्तरूप देने के लिए समय अनुकूल है। नेगेटिव - इस...

    और पढ़ें