ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने जारी किया री-टेंडर:आईएसबीटी टेंडर प्रक्रिया से बाहर नहीं निकल पा रहा, पहली बार में सिंगल टेंडर फाइनल हो रहा था, नियम के तहत नहीं खोला गया

ग्वालियर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) को बनाने का काम टेंडर प्रक्रिया से बाहर नहीं निकल पा रहा है। - Dainik Bhaskar
अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) को बनाने का काम टेंडर प्रक्रिया से बाहर नहीं निकल पा रहा है।

अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) को बनाने का काम टेंडर प्रक्रिया से बाहर नहीं निकल पा रहा है। ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने पहली बार सिंगल टेंडर में स्थानीय कंपनी का नाम सामने आने पर प्रक्रिया को दोबारा से करना तय किया है इसलिए कॉर्पोरेशन ने आईएसबीटी के लिए री-टेंडर अपलोड कर दिया है। 15 दिन से शाॅर्ट टेंडर को इस महीने के अंत में खोला जाएगा।

पुरानी छावनी मार्ग स्थित हजीरा थाना के पास बनने वाले बस टर्मिनल के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने लागत को घटाकर 52 करोड़ कर दिया था। इसके साथ ही जगह भी कम की गई थी इसलिए कॉर्पोरेशन को नए सिरे से टेंडर करना पड़ा। इस बार चार कंपनियों ने टेंडर डाले थे। इसमें तीन कंपनी बाहर की थीं और एक कंपनी स्थानीय थी। तकनीकी पेंच में तीन कंपनियां बाहर हो गईं। सिर्फ एक ही कंपनी बची इसलिए नियमानुसार सिंगल टेंडर होने से कॉर्पोरेशन को री-टेंंडर प्रक्रिया में जाना पड़ा।

अभी करना होगा इंतजार
स्मार्ट सिटी परियोजना के पांच साल खत्म हो चुके हैं। दो साल का अतिरिक्त वक्त मिला है। इसमें भी एक साल चला गया। अब जून 2023 तक का वक्त बचा है। ऐसे में अभी तक 52 करोड़ का प्रोजेक्ट धरातल पर शुरू नहीं हुआ है। अभी टेंडर प्रक्रिया में एक से दो महीने का वक्त लग सकता है।

कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई, पहले नहीं हो पाए टेंडर
जब आईएसबीटी को बनाने की कॉस्ट 72 करोड़ रुपए थी। तब भी कॉर्पोरेशन ने दो बार टेंडर अपलोड किए थे, लेकिन कंपनियों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। इस वजह से टेंडर नहीं हो सके। इस बार निर्माण कीमत और जगह कम करने के बाद टेंडर लगाया गया था। यह भी नहीं हो सका।

खबरें और भी हैं...