जूडा का नया बैच न आने से नाराजगी:हड़ताल पर रहे जूनियर डॉक्टर, मरीज हुए परेशान, इमरजेंसी सेवाओं पर नहीं पड़ा असर

ग्वालियरएक वर्ष पहले
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एक दिन की हड़ताल पर प्रदर्शन करते जूनियर डॉक्टर - Dainik Bhaskar
एक दिन की हड़ताल पर प्रदर्शन करते जूनियर डॉक्टर
  • - हड़ताल का पहला दिन था

ग्वालियर गजराराजा मेडिकल कॉलेज सहित देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों का नया बैच अब तक नहीं आ पाया है। नया बैच नहीं आने के कारण जूनियर डॉक्टरों पर काम लोड बढ़ गया है। नए बैच की प्रवेश प्रक्रिया जल्द खत्म करने की मांग को लेकर GRMC (गजराराजा मेडिकल कॉलेज) के जूनियर डॉक्टर मंगलवार को हड़ताल पर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने बिल्कुल भी काम नहीं किया, सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं में ड्यूटी करते रहे। इस कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। सोमवार को इस मामले में जूडा ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया था।

डॉक्टरों ने काम नहीं किया और अस्पताल में भीड़ लगी रही
डॉक्टरों ने काम नहीं किया और अस्पताल में भीड़ लगी रही

मंगलवार को सुबह से ही जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर रहे हैं। जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं एक दम चरमरा गई। हालांकि हालात न बिगड़ें इसके लिए सीनियर डॉक्टरों ने अस्पताल की कमान संभाली है। सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी से लेकर वार्ड तक लगातार काम किया जिससे जूनियर डॉक्टर की हड़ताल का असर अस्पताल की सेवाओं पर न पड़े। जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल के दौरान प्रदर्शन किया। उन्होंने डॉक्टरों का नया बैच न आने पर नाराजगी जाहिर करते हुए नारेबाजी भी की है। जूनियर डॉक्टर के अध्यक्ष श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस बार अक्टूबर में नीट पीजी का रिजल्ट आया था। रिजल्ट आने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया जिससे काउंसिलिंग शुरू नहीं हो पाई। पहला बैच नहीं आने के कारण जूनियर डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ गया है। इसी बात से नाराज जूनियर डॉक्टराें ने सोमवार को काली पट्टी बांधकर काम किया था। साथ ही डीन को ज्ञापन देकर अपनी मांग से अवगत कराया था।
ऐसे तो यह सत्र शून्य हो जाएगा
जूडा अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 4 जनवरी को होगी। अगर कोर्ट ने फैसला दे दिया तो चिकित्सा शिक्षा विभाग के नए बैच के प्रवेश की प्रक्रिया मार्च तक पूरी हो पाएगी। लिहाजा नया बैच आते-आते अप्रैल बीत जाएगा। इसके यह सत्र शून्य हो जाएगा। इसलिए हम प्रदर्शन कर रहे हैं।
मरीज के परिजन हुए परेशान
- जूनियर डॉक्टर एक दिन की हड़ताल पर रहे हैं, लेकिन अस्पताल में एक दिन में ही व्यवस्थाएं लड़खड़ा गईं। हालांकि सीनियर डॉक्टर और विभाग अध्यक्ष पूरी तरह मुश्तैद रहे पर इसके बाद भी मरीजों के परिजन परेशान होते नजर आए।

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