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पहली बार केंद्र में एक साथ दो मंत्री का संयोग:जो दायित्व पिता पर था, वही ज्योतिरादित्य को मिला, तोमर पर ‘कृषि’ बरकरार

ग्वालियर16 दिन पहलेलेखक: रवींद्र झारखरिया
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मंत्री पद की शपथ लेते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया। - Dainik Bhaskar
मंत्री पद की शपथ लेते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया।
  • केंद्र सरकार के नए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग का प्रतिनिधित्व बढ़ा

ग्वालियर-चंबल संभाग की राजनीति में यह पहला मौका है, जब केंद्र सरकार में एक ही शहर से दो मंत्री हो गए हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा सदस्य चुने गए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में हुए पहले विस्तार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली, जबकि नरेंद्र सिंह तोमर पहले से ही कैबिनेट मंत्री है।

एक संयोग यह भी है कि सिंधिया इससे पहले डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में पहले राज्यमंत्री और फिर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रह चुके हैं। सिंधिया परिवार के मुखिया के तौर पर वे पहले ऐसे सदस्य हैं, जो गैर कांग्रेसी सरकार में मंत्री बने हैं। देश को अटलबिहारी वाजपेयी जैसा प्रधानमंत्री देने वाले ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ यह संयोग भी जुड़ा है कि केंद्रीय मंत्री तोमर और सिंधिया का गृहक्षेत्र भी ग्वालियर है आैर वे यहीं के मतदाता है। तोमर का निर्वाचन क्षेत्र भले ही मुरैना है पर उनका गृहक्षेत्र उपनगर मुरार और मतदान केंद्र शासकीय उमावि मुरार क्रमांक-2 हैं। वहीं अब तक गुना-शिवपुरी क्षेत्र से चुनाव लड़ते रहे सिंधिया का मतदान केंद्र फूलबाग जलविहार में स्थित एएमआई शिशु मंदिर है। वहीं मोदी कैबनेट में तोमर का कृषि मंत्रालय उनके पास ही रहा।

अंचल से केंद्र में सबसे पहले मंत्री थे माधवराव

ग्वालियर-चंबल संभाग से केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व करने का मौका सबसे पहले माधवराव सिंधिया को मिला था। 1984 में ग्वालियर संसदीय सीट से चुनाव जीते सिंधिया को राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार में पहले राज्यमंत्री और फिर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में कार्य करने का मौका मिला। इसके बाद 1991 में पीवी नरसिंहाराव के नेतृत्व वाली सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रहे।

दूसरा मौका ज्योतिरादित्य को मिला

एक विमान हादसे में माधवराव सिंधिया का निधन होने के बाद उनकी राजनीतिक विरासत ज्योतिरादित्य ने संभाली। गुना-शिवपुरी सीट से चुनाव जीतकर 2002 में सांसद बने ज्योतिरादित्य को डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में पहले राज्यमंत्री और बाद में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी मिली। इस बार उन्हें वही मंत्रालय मिला है, जो कभी उनके पिता ने संभाला था।

मोदी की पहली कैबिनेट में ही मंत्री बने तोमर

भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर इस मामले में अपवाद रहे। ग्वालियर संसदीय सीट से निर्वाचित होकर संसद में पहुंचे तोमर को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पहले कार्यकाल 2014 में सीधे कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला। इसके बाद 2019 में वे मुरैना से चुनाव जीते और दूसरी बार केंद्र में कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं तोमर कृषि मंत्री बने रहेंगे, जबकि पंचायतीराज, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण विकास विभाग उनसे ले लिया गया है।

दलगत राजनीति के नजरिए से हिसाब बराबर का

अंचल से केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व करने के मामले को दलगत राजनीति के हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस और भाजपा में मामला बराबरी का है। फर्क इतना है कि कांग्रेस के खाते में जहां एक ही परिवार के दो सदस्य माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य का नाम जुड़ा है, वहीं भाजपा से पहले अकेले नरेंद्र सिंह तोमर थे। अब ज्योतिरादित्य का नाम भी इसमें जुड़ गया है।

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