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  • Lift Of The Largest Kovid Center In The Region Closed For Four Days, The Patient Agitated Before Reaching The Bed

​​​​​​​बेड तक पहुंचने से पहले ही टूट गई सांसें:अंचल के सबसे बड़े कोविड सेंटर की लिफ्ट चार दिन से बंद, पलंग तक पहुंचने से पहले मरीज ने दम ताेड़ा

ग्वालियर2 महीने पहले
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शशि शुक्ला के शव को ले जाते परिजन। - Dainik Bhaskar
शशि शुक्ला के शव को ले जाते परिजन।
  • इलाज के दौरान 36 संक्रमितों की मौत, इनमें 28 ग्वालियर के, 987 नए पॉजिटिव केस

अचंल के सबसे बड़े कोविड सेंटर जेएएच परिसर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की पांच मंजिला इमारत में कोविड संक्रमण से जूझ रहे गंभीर मरीजों को लाने ले जाने वाली लिफ्ट पिछले चार दिनों से बंद है। परिणाम यह कि शिवपुरी से इलाज कराने आईं 62 वर्षीय शशि शुक्ला ने पलंग तक पहुंचने से पहले ही शुक्रवार शाम दम तोड़ दिया। यहां अव्यवस्था जारी है। और मरीजों के परिजन परेशान हैं।

मरीजों को ऊपर तक ले जाने के लिए पर्याप्त संख्या में वार्ड ब्वाय की व्यवस्था न होने से परिजनों को ही खतरा उठाते हुए कोविड वार्डों में स्ट्रेचर धकेलना पड़ रहा है। शुक्रवार को शहर में इलाज के दौरान 36 संक्रमितों की मौत हो गई। इनमें 28 लोग ग्वालियर के हैं। बाकी बाहर के हैं।
3 घंटे से मां फोन लगा रही हैं, कोई नहीं सुन रहा
अर्पित सक्सेना नामक युवक का कहना था कि उनकी मां सुपर स्पेशलिटी की चौथी मंजिल पर भर्ती हैं। पिछले तीन घंटे से वे फोन पर तबीयत गड़बड़ होने की बात कर रही हैं। मैं बार-बार सबसे आग्रह कर चुका हूं, लेकिन अभी तक कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचा। डबरा निवासी रोहित परिहार की समस्या भी कुछ ऐसी ही थी। उनकी मां रेखा परिहार को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। लेकिन रात साढ़े नौ बजे तक कोई यह बताने वाला नहीं था कि उनकी स्थिति कैसी है?
कुछ पार्ट न मिलने से ठीक नहीं हो पा रही लिफ्ट
^सुपर स्पेशलिटी की लिफ्ट खराब होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। उसके कुछ पार्ट न मिलने से ठीक नहीं हो पा रही है। हमने पीडब्ल्यूडी के इंजीनयर को लिफ्ट ठीक कराने के लिए अधिकृत किया है। साथ ही मेंटीनेंस का ठेका भी कर दिया है। लिफ्ट जल्द चालू करा देंगे। -आशीष सक्सेना, संभागायुक्त

बेड तक पहुंचने से पहले ही टूट गईं मेरी मां की सांसें
मैं अपनी मां शशि शुक्ला (62) को इलाज के लिए ग्वालियर लाया था। वे चार दिन पहले पॉजिटिव निकली थीं। उनका ऑक्सीजन लेवल 80 से ऊपर था। वे थाटीपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं, लेकिन वहां वेंटीलेटर नहीं था। हमने पहले यहां के डॉक्टरों से बात की तो वेंटीलेटर की सुविधा मिलने का भरोसा दिया गया। 7.30 बजे हम लोग सुपर स्पेशलिटी आ गए थे। हेल्प डेस्क पर जानकारी नहीं मिल पा रही थी। पहले हमें सुपर स्पेशलिटी के सामने एचडीयू 5 में भेज दिया गया। लेकिन यहां ऑक्सीजन बेड थे। उसके बाद जब मां की स्थिति गड़बड़ होने लगी तो हम लोग स्ट्रेचर पर उन्हें सुपर स्पेशलिटी की पांचवी मंजिल तक ले गए। वहां पहुंचकर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया-जैसा कि शिवपुरी निवासी मयंक शुक्ला ने भास्कर को बताया

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