प्रोजेक्ट:एमआईटीएस ने डीपीआर संशोधित कर निगम को भेजी, लागत 380 करोड़ रुपए ही रहेगी

ग्वालियरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
चंबल नदी से ग्वालियर तक पानी की लाइन बिछाने का प्रोजेक्ट। - Dainik Bhaskar
चंबल नदी से ग्वालियर तक पानी की लाइन बिछाने का प्रोजेक्ट।

चंबल नदी का पानी शहरवासियों को पिलाने बनाई गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को एमआईटीएस संस्थान ने परीक्षण कर लिया है। उन्होंने परीक्षण उपरांत डीपीआर में थोड़ा बदलाव किया है। डीपीआर बनाने वाली कंपनी ने रिपोर्ट में ओएंडएम में कार्य के लिए स्टाफ का वेतन आदि नहीं जोड़ा था। एमआईटीएस टीम ने इसमें 10 करोड़ रुपए की राशि जोड़ी है। हालांकि प्रोजेक्ट कॉस्ट 380 करोड़ ही बनी रहेगी।

नगर निगम ने चंबल नदी का पानी मोतीझील वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक लाने के लिए एक निजी कंपनी से डीपीआर तैयार कराई है। इसके बाद डीपीआर को एमआईटीएस को भेजा था। उन्होंने करीब 15 दिन डीपीआर का अध्ययन पश्चात सुधार कर रिपोर्ट ननि को वापस पहुंचा दी है।निगम को इस कार्य के लिए एमआईटीएस को 6.50 लाख रुपए की राशि दी है।

अब नगर निगम उक्त संशोधित डीपीआर को प्रदेश शासन के मुख्यालय पहुंचाएगा। वहां से केंद्र सरकार को जाएगी। इसके बाद अमृत प्रोजेक्ट-2 के लिए जल योजना पर आगे काम होगा। कार्यपालन यंत्री जागेश श्रीवास्तव का कहना है कि एमआईटीएस से रिपोर्ट संशोधित हो कर आ गई है। थोड़े बहुत तकनीकी बदलाव किए हैं। अब शासन को पहुंचाई जाएगी।

क्या है प्रोजेक्ट

मुरैना में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनना है। यहां से ग्वालियर के हिस्से का 90 एम एलडी पानी देना तय हुआ। इस आधार पर देवरी गांव (पहले अतर सुआ से) से मोतीझील प्लांट तक पानी की लाइन डालने का तय हुआ। शेष पानी के लिए कोतवाल डेम (छोंदा पुल) से 60 एमएलडी पानी रास्ते में लिफ्ट किया जाएगा।

चंबल नदी का पानी ग्वालियर के मोतीझील प्लांट तक 43-45 किलोमीटर का सफर तय करके आएगा। इसके साथ ही पानी की लाइन की कुछ जगह डक्टिंग के माध्यम से लाया जाएगा। यह स्थित ग्वालियर-आगरा हाइवे पर रहेगी।

ये किया हैं आंशिक संशोधन

  • बिजली बिल की राशि कम लिखी गई थी। इसमें बदलाव किया है।
  • पानी की लाइन का ग्राउंड लेवल को अपडेट किया गया है।
  • एई का वेतन छूट गया था। उसे भी जोड़ा गया है।
  • बानमोर और नूराबाद के पास अलाइनमेंट में थोड़ा बदलाव हुआ है।
खबरें और भी हैं...