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कोरोना संक्रमण आंकड़ाें में घटेगा:अब 80% एंटीजन टेस्ट होंगे; ग्वालियर में हर रोज 3750 सैंपलों की जांच होगी

ग्वालियर13 दिन पहले
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ग्वालियर में काेराेना संक्रमिताें की बढ़ती संख्या के बीच प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का नया फरमान हैरान करने वाला है। इसमें कहा गया है कि अब ग्वालियर में कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए आरटी-पीसीआर से ज्यादा रैपिड एंटीजन टेस्ट किए जाएंगे। सरकार ने रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) और आरटीपीसीआर की संख्या भी निर्धारित की है। ग्वालियर में हर रोज 3750 सैंपलों की जांच होगी। इसमें 3000 सैंपल की जांच आरएटी से होगी, जबकि 750 सैंपल की जांच आरटीपीसीआर पद्धति से होगी। यानी कि 80 फीसदी टेस्ट रैपिड एंटीजन पद्वति से हाेंगे।

आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. लोकेश शर्मा का कहना है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट ही काेराेना संक्रमण का पता लगाने की सबसे कारगर पद्धति है। शहर के कुल टेस्ट का 60 फीसदी इस पद्धति से हाेने चाहिए। यदि आरएटी से सैंपल जांचे जाएंगे ताे संक्रमण आंकड़ाें में कम हाेगा, लेकिन हकीकत में संक्रमित छुपे रह जाएंगे। जाहिर है कि इस बदलाव से फाैरी ताैर पर संक्रमण दर घटेगी लेकिन दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं रहेंगे। नई व्यवस्था में अब केवल जयारोग्य चिकित्सालय की कोल्ड ओपीडी व जिला अस्पताल मुरार में ही आरटीपीसीआर की जांच की जाएगी।

सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा से 4 सवाल; शहर में वायरल लोड ज्यादा, आरएटी से ही हो जाएगी संक्रमण की पुष्टि
सवाल 1
: जब आरटी-पीसीआर टेस्ट 70% से अधिक परिणाम दे रहा है ताे अब रैपिट एंटीजन टेस्ट काे बढ़ाकर इसे क्याें घटाया जा रहा है?
जवाब: ये निर्णय शासन स्तर पर किया गया है। कल ही हमें इसकी जानकारी मिली है। ऐसा क्याें किया गया गया है, ये वरिष्ठ अफसर ही जानें।
सवाल 2: पहले गाइडलाइन थी कि आरएटी में निगेटिव आने वाले लाेगाें का आरटी-पीसीआर टेस्ट भी कराया जाएगा, क्या अब भी ऐसा हाेगा?
जवाब: जिन लक्षण वाले मरीजाें की रिपाेर्ट निगेटिव आएगी, उन्हें दवा दी जाएगी। साथ ही ये समझाइश भी दी जाएगी कि वे अपना आरटी-पीसीआर टेस्ट भी कराएं। एंटीजन की निगेटिव रिपाेर्ट दिखाने पर उनका आटी-पीसीआर टेस्ट हाेगा।
सवाल 3: टेस्ट की पद्धति बदलने से शहरवासियाें या काेराेना काे कम करने में क्या मदद मिलेगी?
जवाब: शहर में कोरोना वायरस का लोड काफी ज्यादा है। कुछ समय के लिए ही संक्रमित के संपर्क में आने से दूसरे लोग संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में आरएटी से भी संक्रमण का पता लग जाएगा। इसकी जांच रिपोर्ट मात्र आधे घंटे में मिल जाती है। ऐसे में संदिग्ध को जांच परिणाम के लिए ज्यादा प्रतीक्षा भी नहीं करनी पड़ेगी।
सवाल 4: आईसीएमआर के विशेषज्ञों का मानना है कि आरएटी के परिणाम सही नहीं होते और इससे संक्रमण का पता कम चल पाता है?
जवाब: ये निर्णय शासन स्तर पर लिया गया है, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।

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