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  • On The Pretext Of Ecogreen And Helplessness Of The Municipal Officers, Now Warning Of ESMA, Public Health In Danger Due To Helpless Administration

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कचराघर बना शहर:ईकोग्रीन के बहाने और नगर निगम अफसरों की लाचारी, अब एस्मा लगाने की चेतावनी,  बेबस प्रशासन के कारण जनता की सेहत खतरे में

ग्वालियर2 महीने पहले
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पिछले लगभग एक माह से सफाई न करने को लेकर ईकोग्रीन कंपनी के रोजाना नए बहाने और उनके सामने लाचार दिख रहे नगर निगम के अधिकारियों के कारण त्योहार से पहले शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन न होने के कारण घरों में डस्टबिन भरे रखे हुए हैं।

काेरोना संक्रमण के दौर में घर, गली, मोहल्ला और बाजारों में गंदगी के ढेर से लोग दहशत में हैं। पिछले एक सप्ताह से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। कभी ईकोग्रीन कंपनी तो कभी उसके कर्मचारी रोजाना एक नई मांग कर रहे हैं। इन मांगों को नगर निगम पूरा भी कर रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पा रही है। अंतत: परेशान होकर नगर निगम ने मंगलवार को कलेक्टर को प्रस्ताव भेजकर ईकोग्रीन पर एस्मा लगाने की मांग की है।

दो महीने का वेतन देने के साथ कुछ कर्मचारियों का वेतन नहीं दिए जाने से कर्मचारी हड़ताल पर मंगलवार को भी बने रहे। दो कचरा गाड़ियां सुबह निकली, लेकिन वे भी बाद में कचरा सेंटर पर वापस खड़ी हो गई। आयुक्त संदीप माकिन ने मंगलवार को मोतीमहल संग्रहालय में बनाए गए अस्थाई आॅफिस में जाकर ईकोग्रीन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जिसमें कंपनी पर एस्मा लगाने का फैसला लिया गया।

6 महीने का लगता है एस्मा
आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है। यह अधिकतम 6 माह के लिए लगाया जाता है। एस्मा संबंधी आदेश जारी करने के बाद ईकोग्रीन के 485 कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। संबंधित कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते, अन्यथा हड़तालियों को 6 माह तक की कैद या 250 रु. दंड अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है।

कंपनी की 25 दिन में हर बात मानी, तब भी हालात नहीं सुधरे

19 सितंबर: 4.25 करोड़ का कंपनी ने निगम को बिल दिया। उसमें से सभी कटौती पूरी करने के बाद 1.70 करोड़ की मांग की। नहीं मिलने पर कंपनी प्रबंधन ने ही काम बंद कर दिया।
20 सितंबर: शाम को निगम ने 1000 लीटर रोज डीजल कंपनी को देना का तय किया।
22 सिंतबर: दो महीने का वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी।
23 सिंतबर: कंपनी के दिल्ली से दो अधिकारियों की निगमायुक्त से चर्चा, कंपनी तैयार हुई ।
8 अक्टूबर: कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू की।
9 अक्टूबर: काम शुरू नहीं हुआ तो आयुक्त ने 24 घंटे में कंपनी के वाहन और कचरा सेंटर अधिकृत करने का फरमान सुनाया।
10 अक्टूबर: कंपनी के प्रतिनिधि आयुक्त से मिले। सोमवार से काम करने का आश्वासन दिया।
12 अक्टूबर: कंपनी ने कर्मचारियों के खाते में दो महीने का वेतन डाल फिर भी कम शुरू नहीं।
13 अक्टूबर: कंपनी के 2 कर्मचारियों का वेतन रोक लिया। इस पर फिर कर्मचारी काम पर नहीं आए।

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