भास्कर खास:पंखों के लिए मोरों का न हो शिकार इसलिए इस बार बाजार में गश्ती दल करेंगे निगरानी

ग्वालियर3 महीने पहलेलेखक: अनिल पटैरिया
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मोर पंखों का उपयोग पूजा-पाठ एवं मवेशियों की माला बनाने में होता है। - Dainik Bhaskar
मोर पंखों का उपयोग पूजा-पाठ एवं मवेशियों की माला बनाने में होता है।

दीपोत्सव के पहले जंगल में मोरों का शिकार बढ़ सकता है, क्योंकि बाजार में मोर पंख और इनसे बने आइटम की मांग ज्यादा रहती है। इसे देखते हुए वन विभाग ने मोरों को शिकारियों से बचाने के लिए चिह्नित स्थलों पर गश्त बढ़ा दी है। हालांकि बाजारों में मोर पंख बेचने वाले दिखाई देने लगे हैं। मंगलवार को एसडीओ राजीव कौशल ने बाजार में भी सादा कपड़ों में वन स्टाफ को तैनात कर दिया है। जैसे ही कोई बेचने वालों को मोर पंख देने आएगा, उसे तत्काल पकड़ लिया जाएगा।

दरअसल, अक्टूबर-नवंबर के महीने में जंगल में मोरों के शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इस बार वन विभाग ने जहां मोर ज्यादा संख्या में रहते हैं, उन स्थलों पर निगरानी दल लगा दिए हैं। ये दल रोज जंगल में जा रहे हैं। इसके साथ ही मुखबिर के संपर्क में भी हैं।

वन विभाग ने यहां पर शुरू की गश्त

वन विभाग ने पुरानी छावनी के पास बढ़ का पुरा (पुरानी छावनी), बदनापुरा, पनिहार, पुरासानी, जौरासी, भटपुरा, बैरजा गांव, रायरू फार्म, सिरोल (मर्सी होम), सांतऊ कुशराजपुर और बेहट के जंगलों में निगरानी शुरू कर दी है।

ऐसे करते हैं मोर का शिकार

जंगली जानवरों के शिकार में ज्यादातर पारदी और बंजारा समाज के लोग लिप्त मिलते हैं। मोर के शिकार के निशान न मिलें, इसके लिए बंदूक का उपयोग करते हैं। मोर पंख निकालने के बाद उसका मांस भी बेच देते हैं।

बाजार में गश्ती दल लगा दिए हैं

यह बात सही है कि दीपोत्सव के पहले बाजार में मोर पंख और उससे बने आइटम मिलते हैं। मोरों को शिकारियों से बचाने के लिए चिह्नित स्थलों पर गश्ती दल लगा दिए हैं। मुखबिर भी अलर्ट पर हैं। जैसे ही कोई सूचना मिलेगी, तत्काल शिकारियों को पकड़ लिया जाएगा। -राजीव कौशल, एसडीओ, वन विभाग

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