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नकली प्लाज्मा का असर:3 माह में 300 मरीजों को चढ़ाया था प्लाज्मा, अब 30 दिन में सिर्फ 1 को

ग्वालियर2 महीने पहले
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प्रतिकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतिकात्मक फोटो
  • कारोबारी की मौत के बाद प्लाज्मा चढ़ाना बंद

घटिया प्लाज्मा के कारण दतिया के इलेक्ट्राॅनिक काराेबारी मनाेज गुप्ता की माैत के बाद शहर में काेराेना संक्रमिताें काे प्लाज्मा चढ़ाना बंद कर दिया गया है। शहर के किसी भी सरकारी और निजी अस्पताल में अब गंभीर मरीजाें काे प्लाज्मा थैरेपी नहीं दी जा रही है। ये आश्चर्यजनक है कि 10 दिसंबर से 10 जनवरी के बीच शहर में सिर्फ एक मरीज को प्लाज्मा थैरेपी दी गई।

जबकि कारोबारी की मौत से पहले अतिगंभीर मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी को कारगर माना जा रहा था। कोरोना के अतिगंभीर मरीज सबसे ज्यादा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती हो रहे हैं। वहां भी 3 दिसंबर को आखिरी बार प्लाज्मा चढ़ाया गया था। अब संक्रमण से ठीक हो चुके मरीज प्लाज्मा डोनेट भी नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्लाज्मा कांड से पहले तीन महीने में 302 मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया गया था। जेएएच में 95 लोगों ने प्लाज्मा डोनेट किया था।

परिजन भी अपने मरीज काे प्लाज्मा चढ़वाने के लिए तैयार नहीं

कारोबारी की मौत के बाद से कोरोना संक्रमितों के परिजन भी डरे हुए हैं। सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में कोविड मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. अजय पाल सिंह ने बताया, चूंकि प्लाज्मा थैरेपी देने से पहले मरीज के परिजन से सहमति लेना पड़ती है। कुछ मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने से पहले जब उनके परिजनों से सहमति मांगी, तो उन्होंने मना कर दिया।

पहले से ज्यादा बरत रहे सावधानी, ब्लड बैंक से सत्यापन के बाद चढ़ाया प्लाज्मा

एमएलबी कॉलोनी स्थित निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को 12 दिसंबर को प्लाज्मा चढ़ाया गया। मेडिकल ऑफिसर डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि घटिया प्लाज्मा की घटना के बाद हमने पहले से ज्यादा सावधानी बरतना शुरू कर दिया है। प्लाज्मा मरीज का परिजन ही लेकर आया था। फिर भी हमने प्लाज्मा बैग में लिखे बैंच नंबर के सत्यापन के लिए ब्लड बैंक में फोन लगाया। पुष्टि होने के बाद ही प्लाज्मा चढ़ाया गया।

पहले आईसीएमआर की एडवाइजरी के बाद भी दी जा रही थी प्लाज्मा थैरेपी

प्लाज्मा थैरेपी को लेकर आईसीएमआर ने भी नवंबर के तीसरे सप्ताह में एडवाइजरी जारी की थी। जिसमें इस पद्धति को कोविड मरीजों के इलाज में असरकारक नहीं माना था। एडवाइजरी जारी होने के एक सप्ताह बाद से ही प्लाज्मा की डिमांड में कमी आना शुरू हो गई थी। हालांकि नकली प्लाज्मा मामले से पहले ये थैरेपी देना बंद नहीं किया गया था।

शहर में जेएएच की ब्लड बैंक में भी केवल एक यूनिट प्लाज्मा मौजूद

मिलावटी प्लाज्मा की घटना का असर शहर के ब्लड बैंकों पर देखने को मिल रहा है। वर्तमान में शहर में केवल जेएएच ब्लड बैंक और श्री ब्लड बैंक में प्लाज्मा मिलने की सुविधा है। जेएएच के डॉ. अरुण जैन ने बताया कि वर्तमान में उनके ब्लड बैंक में केवल एक यूनिट प्लाज्मा ही है। जबकि श्री ब्लड बैंक में जब कोई डोनर पहुंचता है, तब प्लाज्मा दिया जाता है। वहां प्लाज्मा स्टॉक में नहीं है।

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