असरदार समझाइश:बिना केस दर्ज किए ही पुलिस ने सुलझा दिए 1754 मामले, सिर्फ 42 मामलों में हुई एफआईआर

ग्वालियर3 महीने पहले
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सिर्फ 42 ऐसे मामले थे जो एफआईआर में बदले - Dainik Bhaskar
सिर्फ 42 ऐसे मामले थे जो एफआईआर में बदले

पुलिसिंग का एक और तरीका शहर में देखा जा सकता है। पिछले 3 साल में 1754 ऐसे मामलों को बिना एफआईआर ही सुलझा दिया, जिनमें एफआईआर भी होती और परिवार भी टूटते। पिछले 3 साल में आलंबन सेल और परिवार परामर्श के पास 2207 मामले आए।

इनमें सिर्फ 42 ऐसे मामले थे जो एफआईआर में बदले। इस तरह न केवल पुलिस ने परिवार टूटने से बचाए बल्कि इन परिवार के लोगों को जुर्म की दुनिया में जाने से भी रोका। इनमें कई मामले वो थे, जो बाद में दहेज एक्ट में बदलते। लेकिन पुलिस की असरदार समझाइश (काउंसिलिंग) ने ऐसा होने से रोका। आलंबन सेल, परिवार परामर्श केंद्र और महिला सेल ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

परिवार परामर्श केंद्र में 3 साल में सिर्फ 15 मामले शेष

घरेलू हिंसा की बात करें तो परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचने वाले सभी मामलों को सुलझा लिया गया। बीते 3 साल में सिर्फ 15 मामले ऐसे थे, जिनमें समझौता नहीं हुआ। 2019 में पूरे 408, 2020 में पूरे 295 जबकि 2021 में 568 मामलों में 553 का निराकरण हुआ। सिर्फ 15 मामले ऐसे थे, जिनमें समझौता नहीं कराया जा सका।

पहले काउंसिलिंग कराते हैं, उसके बाद मामला दर्ज

हमने एक बदलाव यह किया है कि दहेज प्रताड़ना संबंधी जो भी मामले आते हैं। पहले उन्हें काउंसिलिंग में लिया जाता है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होती है। सीधा मामला दर्ज नहीं करते। बुजुर्गों के मामलों में भी बच्चों की कांउसिलिंग करवाई जाती है। इसी के परिणाम बेहतर आ रहे हैं।

-अमित सांघी, एसएसपी, ग्वालियर