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ग्वालियर में दिव्यांग भी बनाए जाते हैं!:रैकेट का खुलासा, सिर्फ एक हजार रुपए में ऑपरेटर बना देता था अंधा, गूंगा और बहरा; गिरफ्तार

ग्वालियर4 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

ग्वालियर में अच्छे भले इंसानों को सार्टिफिकेट बनाकर दिव्यांग भी बनाया जाता है। पुलिस ने एक रैकेट का खुलासा किया है। जिसमें सिविल सर्जन ऑफिस में पदस्थ ऑपरेटर सिर्फ 1 हजार रुपए लेकर किसी को भी गूंगा, अंधा व बहरा बनाकर सार्टिफिकेट जारी कर देता है। इतना ही नहीं इन फर्जी दिव्यांगों की सूची वेबसाइट पर भी अपडेट कर देता था।

इसके बाद यह फर्जी दिव्यांग सरकारी की योजनाओं व दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं को धड़ल्ले से मजे लेते थे। मामले का खुलासा सबलगढ़ मुरैना के तीन लोगों के फर्जी सार्टिफिकेट बनने की शिकायत के बाद हुआ है। पुलिस ने फर्जी दिव्यांग बनाने वाले ऑपरेटर को गिरफ्तार कर लिया है। जल्द ही कुछ और नामों का भी इसमें खुलासा हो सकता है।
यह है पूरा मामला
ग्वालियर में क्राइम ब्रांच व कंपू पुलिस ने एक सूचना के बाद बड़े स्तर पर चल रहे फर्जी दिव्यांग सार्टिफिकेट बनाने के रैकेट का खुलासा। पुलिस को पता लगा था कि कुछ लोगों ने यह जताकर कि उन्हें सुनाई नहीं देता और वह बोल भी नहीं सकते है, इसलिए उनका दिव्यांग सार्टिफिकेट बनाया जाए। उन्होंने किसी तरह सेटिंग करके शारीरिक खामियां बताकर फर्जी दिव्यांग सार्टिफिकेट बनवा लिया। बात में पता चला कि यह फर्जीवाड़ा कर दिव्यांग सार्टिफिकेट सबलगढ मुरैना के रामनरेश त्यागी, बसंत गौर और कपिल धाकड़ ने बनवाए हैं। पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद पड़ताल शुरू की और सीएमएचओ से जाकर पता किया तो उन्होंने बताया कि दिव्यांग सार्टिफिकेट पर उनके साइन नहीं है। न ही उनकी सील लगी है। इसके बाद पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ी तो पता चला कि यह सब खेल आउटसोर्स पर रखे गए एक गुरु नाम के ऑपरेटर का है।। वह एक हजार रुपए लेकर फर्जी दिव्यांग सार्टिफिकेट तैयार कर देता था। उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने अपना नाम गुरू बताते हुए सारे राज खोल दिए।
3 महीने से कर रहा था काम
- पुलिस ने जब पड़ताल की तो पता चला कि ऑपरेटर तीन महीने से सिविल सर्जन ऑफिस में काम कर रहा था। उसे नवंबर 2021 में यहां काम पर रखा गया था। इस दौरान उसने कई दिव्यांग सार्टिफिकेट बनाए हैं, लेकिन उसकी हरकतों को देखते हुए करीब 5 दिन पहले ही उसे कार्यालय से हटा दिया गया था।
जांच कराई तो नहीं निकला बहरा
- मुरैना के बसंत नाम के व्यक्ति द्वारा यह फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया गया था। इसका खुलासा होने पर सामाजिक न्याय निशक्तजन कल्याण विभाग के कर्मचारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। जब बसंत की दोबारा जांच कराई तो वह बहरा नहीं था। वह फिट पाया गया।
फर्जीबाड़े मे हो सकते है कई शामिल
पुलिस को शक है कि इस फर्जी वाड़े में कई लोग शामिल हो सकते है। हो सकता है कि स्वास्थ विभाग और इस दिव्यांग सार्टिफिकेट बनाने वाले विभाग के कुछ लोग पर्दे के पीछे से पैसों का लेन-देन कर रहे होंगे। पकड़े गए ऑपरेटर से पूछताछ के बाद और भी नामों का खुलासा हो सकता है।
पुलिस का कहना
- इस मामले में एएसपी क्राइम राजेश दंडौतिया का कहना है कि यह संगठित अपराध है। इस नेटवर्क मे कई और लोग भी जुडे हो सकते है। फिलहाल ऑपरेटर को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिसके द्वारा यह सर्टिफिकेट तैयार किया गया था। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।