• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • Ravana's Burning Of 60 To 70 Feet Is Not Happening Anywhere, Demand For Effigies Of Leaders More Than Kumbhakarna, Meghnath, Ravana

महंगाई, कोविड ने कम की रावण की डिमांड:60 फीट के रावण का दहन ग्वालियर में कहीं नहीं; इनसे ज्यादा तो नेताओं के पुतलों की डिमांड

ग्वालियर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रावण के पुतले बनकर तैयार रख लिए गए हैं,लेकिन बिक नहीं रहे हैं। - Dainik Bhaskar
रावण के पुतले बनकर तैयार रख लिए गए हैं,लेकिन बिक नहीं रहे हैं।

महंगाई और दशहरा को लेकर कोविड गाइडलाइन देर से जारी होने के कारण रावण दहन पर शहर में असमनजस की स्थिति है। शहर में विजयादशमी के अवसर पर इस बार 60 से 70 फीट के रावण का दहन होते कहीं नहीं दिखेगा। जितने भी बड़े आयोजन होते थे वह इस बार भी नहीं हो रहे हैं। 25 फीट के रावण की डिमांड भी कम है।

अभी तक 5 पुतले ही बिके हैं। जबकि वर्ष 2019 में 30 से ज्यादा पुतले बिके थे। रावण के पुतले की डिमांड कम है, लेकिन मेघनाथ और कुंभकर्ण को तो कोई खरीद ही नहीं रहा। जहां-जहां तीनों के पुतले जलते थे वहां या तो एक पुतला जल रहा है या फिर कार्यक्रम ही नहीं हो रहा है। पुतलों का व्यवसाय करने वालों का कहना है कि दशहरा पर बाजार हल्का है। रावण से ज्यादा पुतले तो नेताओं के बिक रहे हैं।

10 से 15 फीट के पुतले जो हर साल 50 से 60 की संख्या में बिक जाते थे अभी तक 10 बिके हैं
10 से 15 फीट के पुतले जो हर साल 50 से 60 की संख्या में बिक जाते थे अभी तक 10 बिके हैं

कहीं जलेंगे पुतले तो कहीं होंगे रामायण पाठ
विजयादशमी पर कई स्थानों पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। कोरोना संक्रमण से पहले 60 से 70 फीट ऊंचे पुतलों का दहन किया जाता था, लेकिन पिछले साल सार्वजनिक स्थानों पर पुतला दहन की बजाय सोसायटी और कॉलोनियों में ही छोटे-छोटे कार्यक्रमों में रावण के पुतले जलाए गए थे। इस बार कोरोना का डर उतना नहीं है, पर दशहरा को लेकर गाइडलाइन आने में देरी होने आयोजन कम ही हो रहे हैं। फिर भी कुछ आयोजकों ने रावण दहन की बजाय रामायण पाठ और सुंदरकांड को महत्व दिया है।

जहां होता था रावण दहन वहां इस बार क्या है प्लान जानें

  • लोको पर नवदुर्गा समिति से जुड़े सुनील मराठा का कहना है कि रावण दहन किया जाए या नहीं इस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है। रावण दहन होता भी है तो छोटे पुतले (20 से 25 फीट) का दहन किया जाएगा।
  • छत्री बाजार यहां रामलीला समारोह समिति द्वारा रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के 60 और 70 फीट के पुतले जलाए थे। साल 2020 की तरह इस बार पुतला दहन का कार्यक्रम नहीं होगा। समिति के महासचिव विमल जैन ने कहा गाइड लाइन देर से आई थी, इसके बाद तैयारियां करना मुश्किल था इसलिए इस बार रामायण पाठ का कार्यक्रम करना तय किया जा रहा है।
  • थाटीपुर दशहरा मैदार पर शहर का दूसरा सबसे बड़ा आयोजन होता है। यहां ब्लॉक सी के दशहरा मैदान में 20 साल से रावण दहन का कार्यक्रम होता आ रहा है। पिछली बार रावण दहन नहीं किया गया था। इस बार भी पुतले नहीं जलाए जा रहे हैं। आयोजक सांस्कृतिक उत्सव समिति के अध्यक्ष दिनेश दीक्षित ने बताया कि गाइडलाइन में रावण दहन देखने आने वाले लोगों की संख्या सीमित की गई है, आने वालों को रोकना आयोजकों के हाथ में नहीं होता है इसलिए इस बार कार्यक्रम स्थगित रखा गया है
  • दीनदयाल नगर दशहरा मैदान पर चेतना मंच द्वारा 50 और 60 फीट के रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते थे, लेकिन इस बार यहां भी पुतला दहन का कार्यक्रम स्थगित रखा गया है। मंच से दीपक तोमर ने बताया कि इस बार सुंदर कांड, और पौधरोपण करेंगे।
  • नवदुर्गा महोत्सव समिति दीनदयाल नगर द्वारा रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। 15 अक्टूबर को इसके समापन के साथ यहां 35 फीट का रावण का पुतला जलाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष रणविजय सिंह कुशवाह के अनुसार कोविड गाइडलाइन का पालन करेंगे।
  • दशहरा पर जीवाजी क्लब में 25 फीट का रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। कोविड महामारी को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क अनिवार्य किया गया है।

रावण, मेघनाथ व कुंभकर्ण से ज्यादा नेताओं के पुतले बिके
पुतलों का कारोबार करने वालों का कहना है कि कोविड और महंगाई के चलते राणव, मेघनाथ व कुंभकर्ण को कोई नहीं पूछ रहा है, लेकिन नेताओं के पुतले इनसे ज्यादा बिक रहे हैं। हर दूसरे दिन एक पुतला बिक रहा है। इसलिए काम चल जाता है। ज्यादा नेताआंे के पुतलों में 3 से 4 फीट के पुतले की डिमांड रहती है।

महंगाई की मार झेल रहे कारीगर

  • रावण के पुतले बनाकर अपना जीवन यापन करने वाले कारीगरों की बात माने तो लाखन सिंह का कहना है कि 25 फीट का रावण का पुतला दो साल पहले तक 8 हजार रुपए में बिकता था। जिसमें 6 हजार के लगभग लागत आती थी। पर इस साल सामग्री महंगी होने पर यही 25 फीट का पुतला बनाने की लागत 9 हजार के लगभग आ रही है। इसलिए यह 11 से 12 हजार रुपए में बेचा जा रहा है। एक तो महंगाई ऊपर से कोविड गाइडलाइन के चलते राणव के पुतले बिक ही नहीं रहे।
  • रावण के पुतले का व्यवसाय करने वाले कमले का कहना है कि रावण की बिल्कुल डिमांड नहीं है। वह 15 फीट तक के रावण बनाते हैं, लेकिन कोरोना से बीते साल 2020 में धंधा ठप्प रहा। इस साल भी लोगों की रूचि रावण जलाने में नहीं है। डिमांड ही नहीं है 15 फीट के पुतले ही नहीं बिक रहे हैं।
खबरें और भी हैं...