मध्यप्रदेश में उद्योगों को मिली बड़ी राहत:शासन ने प्रदूषण बोर्ड में पंजीयन का शुल्क घटाया; नियमों में हुए बदलाव का सबसे ज्यादा लाभ उद्योगों के संचालकों को मिलेगा

ग्वालियर4 महीने पहलेलेखक: अंशुल वाजपेयी
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सबसे ज्यादा राहत 3 करोड़ से अधिक राशि की लागत वाले उद्योगों को। - Dainik Bhaskar
सबसे ज्यादा राहत 3 करोड़ से अधिक राशि की लागत वाले उद्योगों को।

मध्यप्रदेश शासन ने नए साल में उद्योगों को बड़ी राहत प्रदान की है। उद्योगों को मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीयन के एवज में जो शुल्क जमा करना पड़ता है उसमें 1 जनवरी 2022 से कटौती कर दी गई है। नियमों में हुए बदलाव का सबसे ज्यादा लाभ उन उद्योगों के संचालकों को मिलेगा, जिनका कुल इंवेस्टमेंट 1 से 10 करोड़ रुपए तक का है।

इन उद्योगों को लगभग 90000 रुपए तक की वार्षिक बचत होगी। पूर्व में जो नियम थे, उसमें पंजीयन यानी कि एयर और वाटर एक्ट में कंसेंट टू एस्टेबलिशमेंट के लिए अलग-अलग स्लॉट (1 से 3, 3 से 5 और 5 से 10 करोड़) का शुल्क भी अलग था। नई व्यवस्था में 1 से 10 करोड़ का एक स्लॉट कर दिया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ग्वालियर के कार्यपालन यंत्री आरआरएस सेंगर ने बताया कि अब एयर और वाटर एक्ट में पंजीयन की अधिकम राशि का आंकलन उद्योग की कुल लागत की 0.03 प्रतिशत की दर से वसूला जाएगा। जबक पूर्व में राशि कहीं ज्यादा थी।

क्या है एयर और वाटर एक्ट, क्या हैं इसके मायने

उद्योगों से होने वाले एयर व वाटर पोल्यूशन पर नियंंत्रण के लिए कानून बनाए गए हैं। किसी भी उद्योग को स्थापित करने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एयर और वाटर एक्ट में पंजीयन (कंसेंट) कराना पड़ता है। ये प्रक्रिया अनिवार्य होती है क्योंकि उद्योग संचालक पंजीयन कराते समय ये बताता है कि उद्योग से होने वाले एयर और वाटर पोल्यूशन को नियंत्रण करने के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं।

इसी के आधार पर एयर और वाटर एक्ट में पंजीयन किया जाता है। इसके बाद कंसेंट टू ऑपरेशन मिलती है। जिसे बाद में हर साल रिन्यु कराया जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं के एवज में प्रदूषण बोर्ड उद्योग संचालक से शुल्क वसूलता है।

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