फुटकर कारोबारियों ने प्रशासन से की शिकायत:जगह-जगह खुली आतिशबाजी की दुकानों के चलते फुटकर पटाखा कारोबार 40% घटा

ग्वालियरएक महीने पहले
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मेला ग्राउंड में फुटकर कारोबारी दिनेश जैन, जिनका आधे से ज्यादा माल बच गया। - Dainik Bhaskar
मेला ग्राउंड में फुटकर कारोबारी दिनेश जैन, जिनका आधे से ज्यादा माल बच गया।

दीपावली पर आतिशबाजी का कारोबार करने वाले फुटकर कारोबारियों को इस बार 40 से 50 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा है। इसकी तुलना में थोक कारोबारी फायदे में रहे हैं। दरअसल लंबे समय से शहर में आतिशबाजी की फुटकर बिक्री के लिए मेला ग्राउंड में पटाखा मार्केट लगाया जाता रहा है।

आतिशबाजी की बिक्री के लिए यह शहर का एकमात्र लाइसेंसशुदा फुटकर बाजार है, लेकिन इस बार पुलिस-प्रशासन की अनदेखी की वजह से शहर में गली-गली में आतिशबाजी की फुटकर दुकानें लग गईं। वहीं मेला ग्राउंड स्थित पटाखा मार्केट में भी पिछले साल की 150 दुकानों की तुलना में इस बार 360 दुकानें लगाई गईं, जिससे अधिक मात्रा में माल भर लिया गया।

वहीं इस बार लाेगाें द्वारा विगत वर्षों की तुलना में कम मात्रा में पटाखे खरीदना भी एक अन्य कारण रहा है। एक अनुमान के मुताबिक हर कारोबारी ने 5 से 6 लाख रुपए में 400 से 500 किलो बारूद वाले पटाखों को थोक मार्केट से खरीदा। वहीं अब दुकानदारों के पास 1 से 2 लाख रुपए कीमत का सामान बच गया है।

हर साल 10 करोड़ रुपए की आतिशबाजी बेचा करते थे

मेला ग्राउंड के लाइसेंस होल्डर दुकानदार बताते हैं कि हर साल यहां पर 10 करोड़ रुपए की आतिशबाजी की बिक्री होती थी। लेकिन इस बार 6 करोड़ रुपए की ही आतिशबाजी बिक पाई है। 4 करोड़ रुपए का माल अभी भी मेला ग्राउंड के फुटकर कारोबारियों की दुकानों में रखा हुआ है। यहां के दुकानदार रिंकू अग्रवाल ने बताया कि उसकी दुकान पर 3 लाख रुपए का माल बचा है। कारोबारी दिनेश जैन तो 5 लाख रुपए का माल बचे होने का दावा कर रहे हैं।

फुटकर कारोबारियों ने प्रशासन से की शिकायत

मेला ग्राउंड आतिशबाजी मार्केट संघ के अध्यक्ष हरीश दीवान ने बताया कि उन्होंने एडीएम, एसडीएम को शिकायत कर बताया है कि अकेले गिरवाई की मार्केट से 5 करोड़ रुपए के अवैध और प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री हुई है। गली-गली दुकान लगाने वालों ने इनके यहां से बड़े पैमाने पर माल खरीदा है।

जब इस बारे में गिरवाई के थोक कारोबारी गिर्राज अग्रवाल से पूछा तो उन्होंने यह तो स्वीकार किया कि मेला ग्राउंड के दुकानदारों के अलावा भी जो भी आए, उनको आतिशबाजी बेची गई, लेकिन वे यह बताने को तैयार नहीं हुए कि कितना माल भरा, कितना बेचा और कितना बचा है। अग्रवाल ने दावा किया है कि गिरवाई मार्केट की कोई एसोसिएशन नहीं है। जबकि हरीश दीवान इनको ही गिरवाई मार्केट की एसोसिएशन का अध्यक्ष बताते हैं।

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