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सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी:आईआईटी कानपुर की जांच रिपोर्ट में खुलासा; ग्वालियर में वायु प्रदूषण का सबसे प्रमुख कारण ‘सड़कों की धूल’

ग्वालियरएक महीने पहलेलेखक: अंशुल वाजपेयी
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पहले चरण में 6 मार्च से 26 जून तक की गई थी 5 स्थानों पर सैंपलिंग, दूसरा चरण जारी। - Dainik Bhaskar
पहले चरण में 6 मार्च से 26 जून तक की गई थी 5 स्थानों पर सैंपलिंग, दूसरा चरण जारी।

सड़कों पर उड़ने वाली धूल ग्वालियर की खराब वायु गुणवत्ता का सबसे प्रमुख कारण है। इसका खुलासा वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण खोजने के लिए की जा रही सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी की प्रारंभिक रिपोर्ट में हुआ है। 60 लाख खर्च कर आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ इस स्टडी में जुटे हुए हैं।

प्रदूषण बोर्ड को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, ग्वालियर के जिन पांच स्थानों पर 6 मार्च से 26 जून तक सैंपलिंग की गई, उनमें प्रदूषण के अलग-अलग कारण सामने आए। लेकिन, पांचों स्थानों पर सड़क पर उड़ने वाली धूल को प्रदूषण का एक कारण बताया गया है। हालांकि, आईआईटी कानपुर की दूसरे चरण की सैंपलिंग अभी जारी है। अंतिम रिपोर्ट जून 2022 के अंत तक तैयार हो पाएगी।

क्यों उड़ रही शहर की सड़कों पर धूल

शहर के अधिकांश प्रमुख मार्गों पर नगर निगम ने डिवाइडर बनाए हैं। जिसमें पौधे रोपे हुए हैं। निगम कर्मचारियों ने डिवाइडरों में बहुत ज्यादा मिट्‌टी भर दी है। निगम का अमला जब इन डिवाइडरों में लगे पौधों में पानी डालने जाता है तो पानी के साथ मिट्‌टी भी बहकर सड़क पर आ जाती है।

इस कारण निगम की स्ट्रीट स्वीपिंग मशीन द्वारा सड़क साफ करने के बाद भी मिट्‌टी सड़कों पर आ जाती है। यदि डिवाइडरों की कुल ऊंचाईं से एक से दो इंच कम ऊंचाई तक मिट्‌टी भरी जाए, तो पानी डालने के कारण मिट्‌टी सड़क पर नहीं आएगी। इसके अलावा फुटपाथ पर पैवर्स लगाने से भी धूल की समस्या से निजात मिल सकती है।

स्टडी पूरी होने पर सही तस्वीर सामने आएगीॉ

अभी केवल गर्मी के मौसम में सैंपलिंग की गई है। उस समय कोविड के कारण वाहनों की आवाजाही व अन्य गतिविधियां बहुत सीमित थी। अभी सर्दी के मौसम में स्टडी का दूसरा चरण जारी है। इसके आंकड़े आने के बाद दोनों चरणों की स्टडी का आकलन किया जाएगा। इसके बाद आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ बताएंगे कि किस क्षेत्र में वायु प्रदूषण के क्या कारण हैं और उनकी रोकथाम के लिए क्या उपाय करने होंगे?

-आरआरएस सेंगर, कार्यपालन यंत्री, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड