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ग्वालियर में कर दी गोडसे की पूजा...:हिंदू महासभा ने गोडसे की मूर्ति रखकर कर दी पूजा, पत्रकार बनकर पहुंची पुलिस तो लगा मिला पोस्टर, खाली हाथ लौट आई

ग्वालियर9 महीने पहले
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ग्वालियर में हिमस के भवन में डेस्क पर रखकर गोडसे की मूर्ति का पूजन करते कार्यकर्ता - Dainik Bhaskar
ग्वालियर में हिमस के भवन में डेस्क पर रखकर गोडसे की मूर्ति का पूजन करते कार्यकर्ता
  • आज ही के दिन 15 नवंबर 1949 को गोडसे और आप्टे को दी गई थी फांसी

ग्वालियर में पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे हिंदू महासभा ने महात्मा गांधी के हत्यार गोडसे की मूर्ति रखकर पूजन कर दिया और किसी को भनक तक नहीं लगी। जब पुलिस को पता लगा तो वह पत्रकारों के भेष में वहां पहुंची, लेकिन मूर्ति की जगह पोस्टर लगा मिला। इसके बाद पुलिस वहां से खाली हाथ लौट आई। पर पुलिस को लौटते ही हिंदू महासभा ने फिर मूर्ति की पूजा अर्चना शुरू कर दी। इसके वीडियो फोटो भी जारी हुए हैं, लेकिन प्रशासन के पहुुंचने से पहले मूर्ति को वहां से गायब कर दिया गया है। इससे पहले भी एक मूर्ति प्रशासन यहां से जब्त कर चुका है। उस मूर्ति को 2017 में बनवाया गया था। इस मूर्ति को वापस मांगने हिमस कोर्ट में याचिका लगा रही है।

पुलिस पहुंची तो डेस्क से मूर्ति गायब और पोस्टर लगा मिला
पुलिस पहुंची तो डेस्क से मूर्ति गायब और पोस्टर लगा मिला

ग्वालियर में बनी आप्टे की मूर्ति मेरठ में स्थापित

ग्वालियर के एक घर में चोरी छुपे बनवाई गई गोडसे के साथी नारायण आप्टे की मूर्ति को अब नाथूराम के साथ मेरठ के हिंदू महासभा भवन में स्थापित कर दिया गया है। 15 नवंबर 1949 को दोनों को महात्मा गांधी की हत्या में फांसी हुई थी। इसलिए दोनों की मूर्ति की स्थापना के लिए यह दिन चुना गया। गांधी के हत्यारों की मूर्ति स्थापना से तनाव का माहौल हो गया है। मेरठ पुलिस दो बार पहले भी मूर्ति स्थापना को रोक चुकी है। मूर्ति स्थापना मेरठ में हुई है , लेकिन इसमें ग्वालियर के हिंदू महासभा की टीम का रोल अहम माना जा रहा है। मेरठ के कार्यक्रम की गोपनीय बैठक से लेकर मूर्ति तैयार कराने का पूरा काम ग्वालियर टीम का ही था।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे की बात चले और ग्वालियर व हिंदू महासभा का जिक्र न हो ऐसा हो नहीं सकता है। हिंदू महासभा की एक टीम ने मेरठ हिमस के भवन में सोमवार 15 नवंबर को नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे की मूर्तियों की स्थापना की है। खास बात यह है कि नारायण आप्टे की मूर्ति ग्वालियर में ही बनी है। यह मूर्ति यहां प्रशासन से चोरी छुपे तैयार कराई गई थी। इसके साथ ही नाथूराम गोडसे की मूर्ति भी बनाई गई है। जिसे कभी भी ग्वालियर में स्थापित किया जा सकता है। आप्टे की मूर्ति सितंबर के आखिरी सप्ताह में मेरठ पहुंचा दी गई थी। पहले उसे 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर स्थापित करना था, लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते नहीं हो सकी। अब जाकर मूर्तियों को स्थापित किया है।
मूर्ति बनती रही और प्रशासन को पता भी नहीं चला
ग्वालियर में करीब 3 महीने पहले 2 फीट ऊंची नारायण आप्टे की मूर्ति बनाने का काम शुरू हुआ था। 45 हजार रुपए में तैयार की गई इस मूर्ति का काम सितंबर के आखिरी सप्ताह में पूरा हो गया था। मेरठ में इसकी स्थापना के लिए मूर्ति सितंबर के आखिरी सप्ताह में ही रवाना भी कर दी गई थी, जबकि स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह पहला मौका नहीं है जब हिंदू महासभा ने पुलिस और प्रशासन को चकमा दिया हो। इससे पहले भी वह नाथूराम गोडसे का मंदिर और ज्ञानशाना की स्थापना कर चुके हैं और बाद में प्रशासन ने कार्रवाई की थी।
हम चाहते हैं कि गोडसे को युवा पीढ़ी जाने
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने बताया कि उनका मकसद सिर्फ नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे से पूरे देश के युवाओं को परिचित कराना है। युवा पीढ़ी उनके विचारों को समझें। उनके बारे में जितना बताया जाता है उससे कहीं ज्यादा छुपाया जाता है।

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