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  • Ten Months Later, The Festival Celebrated Forgetting Corona, Visited The Sun Temple On Makar Sankranti, Performed Morning Bath And Performed Charity.

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खुशियों का उत्तरायण:10 महीने बाद बिना बंदिशों के मनाया त्योहार, मकर संक्रांति पर सूर्य मंदिर पहुंचकर किए दर्शन, सुबह किया दान पुण्य

ग्वालियर8 दिन पहले
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मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य मंदिर पर पहुंचे लोग। - Dainik Bhaskar
मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य मंदिर पर पहुंचे लोग।
  • मकर संक्रांति पर दान में दिया गुड़ और तिल, गजक दुकानों पर रही भीड़

बीते 10 महीने में ऐसा कोई त्योहार नहीं रहा, जिस पर कोरोना का साया नहीं पड़ा हो। इतने समय बाद गुरुवार को मकर संक्रांति राहत लेकर आई। इसी दिन कोरोना को मात देने वैक्सीन भी पहुंच गई। गुरुवार को मकर संक्रांति के अवसर पर सुबह लोगों ने स्नान कर सूर्य भगवान के दर्शन किए। सूर्य मंदिर पर सुबह से ही भीड़ लगी थी। जब लोग पहुंचे, तो मंदिर के पट भी नहीं खुले थे। इसके साथ तिल, गुड व खिचड़ी दान कर पुण्य भी किया।

मकर संक्रांति के अवसर पर खेत में सरसों की फसल, पीले फूल भी सूर्य पर चढ़ाए जाते हैं
मकर संक्रांति के अवसर पर खेत में सरसों की फसल, पीले फूल भी सूर्य पर चढ़ाए जाते हैं

58 साल बाद बना ऐसा संयोग

ज्योतिषाचार्य विजय भूषण वेदार्थी के अनुसार मकर संक्रांति पर सुबह 8.14 बजे भगवान सूर्य देवगुरु बृहस्पति और चन्द्रपुत्र बुध के साथ अपने पुत्र शनि से मिले। मकर संक्रांति पर यह योग करीब 58 साल बाद बना है। इससे पहले इस तरह का योग 1962 में सुबह 4.55 बजे बना था। उस समय इन ग्रहों के साथ केतु और युति भी थी। इस योग में भगवान भास्कर की पूजा के साथ-साथ देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने सुबह से ही भगवान दत्तात्रेय व शनिदेव मंदिर पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया।

यह है मान्यता

मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से भगवान भास्कर अर्थात् सूर्यदेव की पूजा आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन से दिन तिल-तिल कर बढ़ने लगते हैं। अत: संक्रांति के दिन तिल, गुड़, चीनी मिले लड्‌डू खाने और दान देने का विशेष महत्व है। इससे पुण्य मिलता है।

इस बार देर से शुरू होंगे शुभ कार्य

वैसे तो मकर संक्रांति के साथ ही मलमास की समाप्ति के बाद शुभ मांगलिक कार्य होना प्रारंभ हो जाते हैं, लेकिन इस वर्ष मलमास के समाप्त होते ही 17 जनवरी सुबह 10.53 बजे गुरु ग्रह अस्त होने के कारण शुभ मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। गुरु ग्रह का उदय 15 फरवरी को होगा, लेकिन इससे पूर्व 13 फरवरी से शुक्र तारा अस्त होने के कारण विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं।

कई महीनों बाद कोरोना की दहशत नहीं

पिछले कुछ बड़े त्योहार या राष्ट्रीय पर्व ऐसे रहे जो कोरोना की दहशत की भेंट चढ़ गए। ऐसे में मकर संक्रांति साल 2021 के पहले त्योहार के रूप में मनाया जाता है। साल 2021 के पहले त्योहार पर ही कोरोना का डर सबसे कम है। आंकड़ों से समझते हैं किस त्योहार पर क्या थी कोरोना की स्थिति।

दिन - त्योहार - संक्रमित - मौत

5 जुलाई - हरियाली तीज - 56 - 02

3 अगस्त - रक्षा बंधन - 203 - 04

12 अगस्त - जन्माष्ठमी - 77 - 03

15 अगस्त - स्वतंत्रता दिवस - 67 - 03

24 अक्टूबर - नवरात्रि - 47 - 01

25 अक्टूबर - दशहरा - 35 - 01

14 नवंबर - दीपावली - 91 - 00

14 जनवरी 2021 - मकर संक्रांति - 47 - 00

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