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ग्वालियर में क्रिकेट सटोरिए हुए आत्मनिर्भर:दुबई, ब्रिटेन के नंबर लेकर खुद चला रहे सट्टे की लाइन, आईपीएल नहीं फिर भी माह में 10-12 करोड़ रुपए का कारोबार

ग्वालियर16 दिन पहलेलेखक: संजय बौहरे
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1 जनवरी से अगस्त तक के 3 साल के सट्‌टे एक्ट के मामले। - Dainik Bhaskar
1 जनवरी से अगस्त तक के 3 साल के सट्‌टे एक्ट के मामले।

सट्टेबाजों पर कड़ी कार्रवाई न होने का फायदा उठाकर कोरोनाकाल में शहर के क्रिकेट सटोरिए भी आत्मनिर्भर बन रहे हैं। शहर के आधा दर्जन सटोरियों ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की सेवा लेकर ऑनलाइन सट्टे की खुद की लिंक लाइनें बनाकर दिल्ली, मुंबई व दुबई में बैठकर सट्टा खिलाना शुरू कर दिया है।

सटोरियों ने दुबई व ब्रिटेन के सिम नंबर पर अपनी खुद की लाइनें बनाई है। सट्टे की रकम का हिसाब भी स्थानीय सरगना स्वयं कर रहे हैं, जबकि पहले दुबई, मुंबई व दिल्ली के सटोरियों से लिंक लाइन लेकर शहर के सटोरिए सट्टा लगवाते थे और हिसाब भी वहीं होता था। शहर में क्रिकेट सट्टे का कारोबार बढ़ने पर लोकल सटोरियों ने अपनी सट्टे की लिंक लाइनें इंदौर, भोपाल के भी छोटे सटोरियों को कमीशन पर दी हैं।

इस धंधे से जुड़े लोगों के मुताबिक शहर में आईपीएल में सटोरियों का कारोबार चरम पर 100 करोड़ के लगभग पहुंच जाता है। जबकि आमदिनों में एक माह में 10-12 करोड़ रुपए का कारोबार कर रहे हैं। विश्व में कहीं भी किसी भी टीम के बीच अंतरराष्ट्रीय मैच हो पर ग्वालियर में सट्टा लगना तय है। शहर के सटोरिए ग्वालियर के साथ ही प्रदेश और देश में भी क्रिकेट सट्‌टा खिला रहे हैं।

पड़ताल के लिए लगाई है साइबर की टीम

हुंडी दलाल से ठगी के मामले में बड़े क्रिकेट सटोरियों की गैंग का खुलासा हुआ है। इनके नेटवर्क में कई महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी मिली है, अब साइबर टीम को लगाया गया है। -अमित सांघी, पुलिस अधीक्षक

सख्त कानून हो तभी लग पाएगी रोक

सट्टा बड़ी सामाजिक बुराई है, इस कारोबार में सफेदपोश प्रभावशाली भी शामिल रहते हैं। सट्‌टे की वजह से कई परिवार बर्बाद हो गए। लोग खुदकुशी कर रहे हैं। सटोरिए पकड़े जाने के बाद आसानी से छूट जाते हैं। नारकोटिक्स एक्ट जैसा सख्त कानून बने तभी इन पर रोक लग पाएगी। -एसएस शुक्ला, सेवानिवृत्त एडीजी

इसलिए बच जाते हैं सटोरिए क्योंकि सट्‌टा का पूरा कारोबार ऑनलाइन है

क्रिकेट सट्टे में सैकड़ों परिवार बर्बाद हो गए और कई युवा कारोबारियों ने खुदकुशी कर ली, लेकिन क्रिकेट सट्टा अपराध का कॉलम ही नहीं हैं। इसका कारण यह है कि क्रिकेट का सट्टा ऑनलाइन संचालित होता है। पूर्व में इसमें टीवी पर क्रिकेट मैच देखकर सट्टा लगाया जाता था लेकिन अब मोबाइल पर ही लिंक लाइन लेकर ऑनलाइन सट्टा खेला जाता है।

यदि क्रिकेट सट्टे की पड़ताल की जाती है तब उसमें सटोरिए व उसके नजदीकियों के कई बैंक खातों की पड़ताल करना पड़ती है। पकड़े जाने पर सटोरिए अपना पूरा हिसाब-किताब व लिंक को डिलीट कर देते हैं, इसे भी रिकवर करना जरूरी होता है। इन सब तकनीकी खामियों के कारण सटोरिए पुलिस पर भारी पड़ते हैं और फिर सामान्य सट्टे का मामला दर्ज कर लिया जाता है। इसी का वे फायदा उठाते हैं।

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