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  • The Body's Immunity Is Decreasing Due To The Deficiency Of Zinc, Iron manganese In Wheat rice And Pulses.

मिट्‌टी की सेहत खराब:गेहूं-चावल व दाल में जिंक, आयरन- मैगनीज की कमी से घट रही है शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता

ग्वालियर2 महीने पहलेलेखक: दिनेश गुप्ता
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लैब में मिट्टी की जांच करते अधिकारी। - Dainik Bhaskar
लैब में मिट्टी की जांच करते अधिकारी।
  • अधिक उर्वरकों के उपयोग से 90 प्रतिशत तक नाइट्रोजन घटी

जांच और शोध से यह साफ हो गया है कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग ही ज्यादा कोरोना संक्रमित हुए। चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि इन दिनों गेहूं, चावल, दाल, ज्वार-बाजरा तथा हरी सब्जी के उपयोग से भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी विकसित नहीं हो रही है जितनी होना चाहिए। इसका कारण खेत में अधिक उर्वरक के उपयोग से मिट्‌टी में 40 फीसदी तक जिंक, आयरन और मैगनीज की कमी होना है।

हर खाद्यान्न में मौजूद यही वे तत्व हैं तो हर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में 2020-21 में 4401 मिट्‌टी के नमूने लिए गए। जांच 12 मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की हुई। सर्वाधिक 90% तक कमी नाइट्रोजन की मिली। इससे पौधों का हरा भाग व दाना नहीं बनता। फॉस्फोरस की कमी 10% नमूनों में मिली है। इसी कारण पौधे मिट्‌टी से तत्व नहीं ले पा रहे हैं। पोटाश भी 12% नमूनों में कम मिली है।

जिंक, आयरन और मैगनीज का असर

  • मिट्‌टी के 40% नमूनों में जिंक 0.2 पार्टस प्रति मिलियन तक निकला है जबकि इसका मानक 0.5 से अधिक है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता घटी है।
  • मिट्‌टी के 41% नमूनों में कमी मिली है। इससे शरीर में ब्लड बनने की प्रक्रिया बाधित होती है। {मैगनीज की मात्रा 36 व सल्फर की मात्रा 6% नमूनों में कम मिली। इससे तेल वाली फसल हल्की होने से तेल कम मिल रहा है।

अच्छा संकेत: चना बढ़ाएगा नाइट्रोजन
पहली बार चने का रकवा 9 हजार 210 हेक्टेयर बढ़ा है। पिछले साल 5092 हेक्टेयर में चना बोया गया था, इस बार 14302 हेक्टेयर में बोवनी हुई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक चने का रकबा बढ़ने से मिट्‌टी में नाइट्रोजन का प्रतिशत बढ़ेगा।

एक्सपर्ट: अनाज के बाद दलहनी फसल लेना चाहिए
मिट्‌टी की क्वालिटी में आ रही गिरावट का कारण अधिक मात्रा में उर्वरकों का उपयोग है। हर बार एक जैसी फसल लेना भी दूसरा कारण है। अनाज वाली फसल के बाद दलहनी फसल लेना चाहिए। किसान को यह भी समझना होगा कि कब किस उर्वरक की कितनी मात्रा का उपयोग किया जाना है। खेत में जरूरत के मुताबिक जैविक व कछुआ खाद डालना चाहिए तभी मिट्‌टी की क्वालिटी में सुधार होगा।
-आनंद बिहारी सडैया, सहायक मृदा सर्वेक्षण अधिकारी

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