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  • The Case Went On For 9 Months, Did Not Understand Even After 8 Counseling; Lawyer Couple Reconciled Through Social

जिन्हें तलाक के लिए चुना, उन्होंने ही फिर से मिलाया:ग्वालियर में 9 महीने चला केस, 8 काउंसिलिंग के बाद भी नहीं समझे; वकील दंपती ने करा दी सुलह

ग्वालियरएक वर्ष पहले

ग्वालियर के फैमिली कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां 9 महीने से तलाक का एक केस चल रहा था, तलाक के लिए लड़ रहे पति-पत्नी की करीब 8 बार काउंसलिंग हो चुकी थी। दोनों सुलह को तैयार नहीं थे। केस की खास बात ये थी कि दोनों की ओर से पैरवी कर रहे वकील भी आपस में पति-पत्नी थे। यही इस केस का टर्निंग पॉइंट रहा। जिन्हें तलाक के लिए चुना था, उन्होंने ही दोनों को फिर से मिलाया।

यहां दोनों की ओर से पैरवी कर रहे वकील दंपती ने प्रोफेशनल न होकर सोशल होते हुए सोचा और आखिरी प्रयास किया। तलाक लेने पर अड़े दंपती को तलाक के मायने समझ में आए। वह वापस एक होने के लिए सहमत हो गए। पैरवी करने वाले वकील दंपती का कहना था कि हम दोनों में से कोई एक केस जीतता तो कोई एक केस हारता भी, लेकिन समझौते में दोनों की जीत हुई है।

शादी से लेकर तलाक लेने और फिर मन बदलने की कहानी
ग्वालियर निवासी 25 वर्षीय काजल (बदला हुआ नाम) प्राइवेट हॉस्पिटल में नर्स हैं। 2019 में उसकी पहचान अपने एक दोस्त के माध्यम से रीवा निवासी रविकुमार (बदला हुआ नाम) से हुई थी। रवि ठेकेदार है। वह किसी ठेके के सिलसिले में उन दिनों ग्वालियर आया हुआ था। यहां नर्स से उसकी दोस्ती हो गई। फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। परिवार ने भी लव मैरिज को अरेंज का रूप देकर दोनों की शादी करवा दी।

शादी के कुछ माह तक तो दोनों साथ रहे, लेकिन उसके बाद उनमें विवाद होने लगे। इस पर काजल ससुराल छोड़कर मायके ग्वालियर में आकर रहने लगी। लगभग दो साल से दोनों अलग रह रहे थे। जुलाई 2021 में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन दे दिया। न्यायालय में तलाक का आवेदन आने पर दोनों की काउंसलिंग की गई। काउंसलिंग में भी दोनों ने कह दिया कि उनके मन मेल नहीं खाते हैं। इसलिए अलग रहना चाहते हैं।

परिवार व रिश्तेदारों का दबाव भी काम नहीं आया। साथ रहने के लिए दोनों ही तैयार नहीं हुए। जज के सामने भी दोनों ने आपसी सहमति से अलग रहने के लिए गवाही दे दी। गवाही होने के बाद कोर्ट को इनके तलाक पर डिक्री पारित करना थी। अगली तारीख पर दोनों काे तलाक की डिक्री लेने के लिए बुलाया, लेकिन डिक्री लेने से पहले ही दोनों का मन बदल गया। कोर्ट में साथ रहने की सहमति दे दी और तलाक लेने से इनकार करते हुए अपना केस वापस ले लिया।

वकील बोले- हमने सामाजिक होकर सोचा
रवि की तरफ से एडवोकेट अरविंद द्विवेदी पैरवी कर रहे थे। काजल की ओर से उनकी पत्नी सीमा द्विवेदी पैरवी कर रही थीं। वकील दंपती ने दोनों को जोड़ने का प्रयास किया। एडवोकेट अरविंद ने बताया कि हम दंपती थे और दांपत्य का महत्व जानते थे। हमने प्रोफेशनल होकर नहीं बल्कि सोशल नजरिए से सोचा। इसके बाद दोनों को साथ बैठाया। दोनों को तलाक के मायने समझाए। इसके बाद उनकी समझ में कुछ आया और वह वापस एक होने के लिए तैयार हुए।

हम समझते हैं पति-पत्नी का रिश्ता
पैरवी करने वाले एडवोकेट अरविंद व उनकी पत्नी सीमा ने बताया कि इस केस में जीत-हार से ज्यादा इस रिश्ते को बचाने के लिए काम किया, क्योंकि तलाक के लिए कोर्ट में खड़े पति-पत्नी थे। सीमा ने कहा कि हम पति-पत्नी के बीच के रिश्ते को अच्छी तरह समझते थे। यही कारण था कि 9 महीने से कोर्ट में जो मामला चल रहा था, 8 काउंसलिंग हो चुकी थीं। उस केस को हम अपनी काउंसिलिंग से सुलझा पाए।

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