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  • The Children Who Were Educated And Made Capable, They Were Helpless In Old Age, So The Police Held Hands, Got Their Rights Along With The House.

बुजुर्गों की मददगार बनी पुलिस:जिन बच्चाें काे पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया, उन्होंने ही बुढ़ापे में किया बेसहारा ताे पुलिस ने थामा हाथ, घर के साथ हक भी दिलाया

ग्वालियर25 दिन पहले
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  • आलंबन सेल में 106 बुजुर्गाें ने की फरियाद, इनमें से 25 ऐसे, जिन्हें उनके घर से निकाला

जिन बच्चों के लिए माता-पिता ने खुद का जीवन न्यौछावर कर दिया। उन्हें पढ़ाने-लिखाने और काबिल बनाने के साथ उनकी मुस्कुराहट के लिए अपनी खुशियां कुर्बान कर दीं, लेकिन उन्हाेंने ही बुढ़ापे में माता-पिता काे बेसहारा कर दिया। ऐसे बुजुर्गों का सहारा बनी पुलिस। 1 जनवरी 2021 से 30 मई 2021 तक ऐसे 11 बुजुर्गों को पुलिस ने उनका हक दिलाया, जिन्हें उन्हीं के बच्चों ने उस घर से बेघर कर दिया, जिसे जीवनभर की पूंजी लगाकर खड़ा किया था।

11 में से 6 मामलों में आलंबन सेल ने बुजुर्गों को उनका हक दिलाया तो 5 मामले शहर के अलग-अलग थानों के हैं। सेल की प्रभारी सब इंस्पेक्टर सरोज ने बताया कि 106 मामले इस साल आए। इनमें से बुजुर्गों को बेघर करने और भरण पोषण न देने के 25 मामले हैं। अभी तक 6 बुजुर्गों को उनका हक दिला चुके हैं। ऐसे 10 मामलों में अभी काउंसिलिंग चल रही है।

केस- 1; ससुर काे घर से निकाला, बहू ने काउंसिलिंग के बाद मानी गलती
गोल पहाड़िया स्थित कंबल केंद्र के पास रहने वाले 70 वर्षीय वृद्ध के बेटे का निधन हो गया था। कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा। इसके बाद घर में रहने के लिए बहू ने अपने मायके वालों को बुला लिया। इसके बाद कुछ दिन बाद वृद्ध को घर से निकाल दिया। वह कुछ दिन घर के बाहर ही बैठे रहते थे, फिर पड़ोसी की मदद से 24 फरवरी को आलंबन सेल पहुंचे। सेल की टीम ने दो बार उनकी बहू को बुलाया। काउंसिलिंग के बाद बहू ने गलती स्वीकार की और अब वृद्ध बहू के साथ रहते हैं।
केस- 2; मकान नाम करने से मना किया ताे बेटे-बहू ने मां को घर से निकाला
हजीरा के बिरला नगर की रहने वाली 64 वर्षीय वृद्धा विमला(परिवर्तित नाम) के पति का 2020 में निधन हो गया। वृद्धा ने अपना मकान बेटे-बहू के नाम करने से मना कर दिया तो दाेनाें ने उन्हें खाना तक देना बंद कर दिया। 11 मार्च को घर से निकाल दिया। इसके बाद वह हजीरा थाने पहुंचीं। पुलिस उनके बेटे और बहू को पकड़कर थाने ले आई। थाने पहुंचते ही माफी मांगने लगे। पुलिस ने दोनों से लिखित में लिया कि वह वृद्धा का भरण पोषण करेंगे। इसके बाद दोनों वृद्धा को घर ले गए।

थानों में आलंबन सेल की तरह करेंगे व्यवस्था
^बुजुर्गों की मदद के लिए पुलिस हमेशा तैयार है। आलंबन सेल की तरह हर थाने में भी यह व्यवस्था करेंगे कि बुजुर्गों को यहां तक परेशान न होना पड़े। थाने में ही पुलिसकर्मी और काउंसलर मिलकर बुजुर्गों की मदद करेगा। अभी तक एक दर्जन बुजुर्गों को उनका हक दिलाया है। जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कीं। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण बंद पड़ी काउंसिलिंग अब फिर से शुरू होगी।
-अमित सांघी, पुलिस अधीक्षक,

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