• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • The High Court Said That The Husband And Wife Are Living Separately For 10 Years, There Is Neither Love Nor Affection Between Them, So The Court Approved

10 साल पहले मनमुटाव अब तलाक हुआ मंजूर...:हाईकोर्ट ने कहा, पति-पत्नी सालों से अलग रह रहे हैं, इनके बीच प्रेम दिख रहा है न स्नेह

ग्वालियर7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • ग्वालियर हाईकोर्ट ने भिंड कुटुंब न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए तलाक किया मंजूर

ग्वालियर हाई कोर्ट की युगल पीठ ने 10 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी के तलाक की मंजूरी दे दी है। इसके लिए हाई कोर्ट ने कुटुंब न्यायालय भिंड के आदेश को भी खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि पति-पत्नी काफी सालों से अलग-अलग रह रहे हैं। उनके बीच न तो प्रेम दिखता है न ही स्नेह बचा है। साथ ही दूसरा भी कोई कारण (बच्चा) ऐसा नजर नहीं आता है जिससे उनके विवाह को बचाए रखा जा सके। इन हालातों में दोनों के विवाह को शून्य घोषित किया जाता है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पति-पत्नी के बीच उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए यह आदेश दिया गया है।
यह है पूरा मामला
- ग्वालियर निवासी 33 वर्षीय ममता (बदला हुआ नाम) का विवाह 22 नवंबर 2008 को भिंड निवासी राजेश (बदला हुआ नाम) के साथ हुआ था। शादी के दो साल में ही दोनों के बीच विवाद होने लगे और दोनों अलग-अलग रहने लगे। साल 2010 से दोनों अलग रह रहे थे। वर्ष 2012 में यह मामला भिंड कुटुंब न्यायालय में आया था। इस मामले में कुटुंब न्यायालय ने दोनों के तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। इस मामले को महिला की ओर से वर्ष 2015 में ग्वालियर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस मामले में पति-पत्नी की ओर से दोनों वकीलों का कहना था कि इस मामले में सुलह की संभावनाएं नहीं हैं। वहीं महिला के अधिवक्ता का कहना था कि पति के शत्रुतापूर्ण और खराब व्यवहार के चलते उसने तलाक लेने का निर्णय लिया है। उनका यह भी कहना था कि उसकी गर्भावस्था के दौरान न केवल पति ने बल्कि परिवार के सदस्यों ने उसके साथ गलत व्यवहार किया था। इस कारण से उसे मानसिक पीड़ा हुई। जब महिला पहली बार गर्भवती हुई थी तब उसके पति ने उसका गर्भपात करा दिया था। दूसरी बार उसने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन दो माह बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। इतना ही नहीं उसके माता-पिता से दहेज भी मांगा जाता रहा था। महिला ने कोर्ट को बताया कि उसके पति ने दूसरा विवाह भी कर लिया है, इसके फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने दूसरे विवाह के फोटो रिकार्ड पर लेते हुए कहा कि सुलह की संभावना नहीं दिख रही है। इसके बाद कोर्ट ने तलाक को मान्य कर दिया।
नहीं मांगा भरण पोषण
हाई कोर्ट की युगल पीठ ने कुटुंब न्यायालय भिंड के आदेश को खारिज करते हुए पत्नी के तलाक को मान्य कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 10 साल से पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे हैं। उनके बीच न तो प्रेम है और न ही कोई स्नेह बचा है। न ही कोई ऐसा कारण दिख रहा है कि जिससे उनका विवाह पुनर्जीवित हो सकता हो। ऐसी परिस्थिति में उनके बीच विवाह को शून्य घोषित किया जाता है। इस मामले में पत्नी ने स्थायी भरण पोषण राशि की मांग नहीं की थी, इसलिए कोर्ट ने भरण पोषण राशि का आदेश नहीं दिया।

खबरें और भी हैं...