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  • The Kshatriya Mahasabha Said That The Word Gurjar Is Not Mentioned In The Resolution Of The Statue, Later On Whose Behest This Word Was Added, Strict Action Should Be Taken Against Him.

सम्राट मिहिर भोज जाति विवाद:क्षत्रिय महासभा ने कहा- मूर्ति के ठहराव प्रस्ताव में गुर्जर शब्द का उल्लेख नहीं, बाद में किसने यह जोड़ा, उस पर एक्शन हो

ग्वालियर2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

ग्वालियर में सम्राट मिहिर भोज की जाति को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। मामला हाईकोर्ट में है। कमेटी भी बना दी गई है। उसके बाद भी गुर्जर और क्षत्रिय अपने-अपने दावे से पीछे हटते नजर नहीं आ रहे। बुधवार को क्षत्रिय महासभा ने फिर इस मामले में पक्ष रखा।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (संयुक्त माेर्चा) द्वारा सम्राट के क्षत्रिय राजपूत होने के संबंध में ऐतिहासिक तथ्य पेश किए। इसके साथ ही प्रतिमा पर 'गुर्जर' शब्द का उल्लेख करने को नगर निगम अफसरों की बड़ी गड़बड़ी बताई है। उनका कहना है कि ठहराव प्रस्ताव में 'गुर्जर' शब्द का नाम तक नहीं था, लेकिन अचानक से यह नाम प्रतिमा पर कैसे आ गया। इस विवाद को जान बूझकर जन्म दिया गया है। जिसने भी यह चूक की है, उसके खिलाफ एक्शन लिया जाना चाहिए। वहीं, गुर्जर समाज लगातार साक्ष्य एकत्रित कर जांच कमेटी के पास पहुंचा रहा है।

उनका कहना है कि हाईकाेर्ट ग्वालियर युगल पीठ के आदेश पर चिरवाई नाके पर स्थित सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के नीचे नामकरण पट्टिका को पूर्णतः ढंक दिया गया है। आदेश के मुताबिक "सम्राट मिहिर भोज" की प्रतिमा जनमानस के दर्शनार्थ खुली रखी जाए, जिससे लोग मिहिर भोज के शौर्य और पराक्रम से प्रेरणा ले सकें। प्रशासन ने प्रतिमा के पोर्च एरिया को टीन से कवर किया है। नाम शिला पटि्टका अभी भी खुली है। क्षत्रिय महासभा ने मांग की है कि नाम पट्‌टिका को ढंका जाए और चारों तरफ से लगाई की टीन हटाई जाए।

क्षत्रिय महासभा ने यह तथ्य रखे
राजस्थान के जालौद स्थित किला में शिलालेख में उल्लेख किया गया है कि यह दुर्ग पर विभिन्न कालों में प्रतिहार, परकार, चालुक्य, सोलंकी, चौहान, राठौड़ आदि का शासन रहा है।
- राजस्थान पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित पुरातत्व सर्वे ऑफ इंडिया 2006-07 का सर्वे महत्वपूर्ण है। उसमें प्रतिहार वंश का उल्लेख मिलता है।
- आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा चित्तौड़गढ़ के किले पर प्रतिहार राजवंश का शासन उल्लेखित शिलालेख स्थापित है।

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