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  • The Mughal Emperor Was Afraid Of Guru Hargobind Singhji, Was Released With 52 Kings In Gwalior And The Name Was Given To The Donor, Leaving The Captive, The Gurdwara Built As A Memorial, Felt 100 Kg Of Gold

400 साल पूरे हो रहे 'दाताबंदी छोड़' की कहानी:गुरु हरगोबिंद सिंह ने अपनी सूझबूझ से जांहगीर की कैद से 52 राजाओं को छुड़वाया था; आज ग्वालियर की वही जेल धार्मिक स्थल

ग्वालियर4 महीने पहलेलेखक: रामेंद्र परिहार
ग्वालियर किला स्थित गुरुद्वारा।

ग्वालियर के दाता बंदी छोड़ की घटना को 400 साल पूरे होने जा रहे हैं। चार से छह अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसमें देश-विदेश से एक लाख से ज्यादा सिख श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। यह कहानी जुड़ी है सिखों के छठवें और सबसे कम उम्र में गुरु हरगोबिंद सिंह से। इस दाता बंदी छोड़ की कहानी क्या है? किस तरह से उन्होंने 52 राजाओं को आजाद कराया? कब गुरुद्वारा बना, उसमें 100 किलो सोना कब लगा है? सब कुछ जानिए इस खबर में ...

हरगोबिंद सिंह वह पहले गुरु थे, जिन्होंने सिख सेना की नींव रखी थी। सिखों को सेना के रूप में संगठित करने का श्रेय भी उनको ही जाता है। गुरु हरगोबिंद सिंह का जन्म अमृतसर में वड़ाली गांव में माता गंगा और पिता अर्जुन देव के यहां 18-19 जून 1595 को हुआ था। 11 साल की उम्र में सन 1606 में उन्हें गुरु की उपाधि मिल गई थी। इसलिए उनको बच्चा गुरु भी कहा जाता है।

उनको अपने पिता पांचवें गुरु अर्जुन देव से उपाधि मिली थी। हरगोबिंद सिंह जी को धर्म में वीरता की नई मिसाल जगाने के लिए भी जाना जाता है। वह अपने साथ सदैव मीरी और पीरी नाम की दो तलवारें धारण करते थे। एक तलवार धर्म के लिए और दूसरी धर्म की रक्षा के लिए। मुगल शासन के आदेश पर गुरु अर्जुन सिंह को फांसी दे दी गई, तब गुरु हरगोबिंद सिंहजी ने सिखों का नेतृत्व संभाला। एक नई क्रांति को जन्म दिया और आगे चलकर सिखों की विशाल सेना के लिए आधार दिया। गुरु हरगोबिंद की मृत्यु 1644 पंजाब के कीरतपुर में हुई थी।

यह गुरुद्वारा किले की सबसे ऊंची इमारत में से एक है, दाताबंदी छोड़ के 400 साल पूरे होने पर हो रहा है विश्वस्तरीय उत्सव
यह गुरुद्वारा किले की सबसे ऊंची इमारत में से एक है, दाताबंदी छोड़ के 400 साल पूरे होने पर हो रहा है विश्वस्तरीय उत्सव

ग्वालियर की घटना ने नाम दिया दाताबंदी छोड़
गुरु हरगोबिंद सिंह को दाता बंदी छोड़ नाम देने के लिए ग्वालियर के किले पर हुई वह घटना है, जो आज से 400 साल पहले 1621 में घटी थी। मुगल बादशाह जांहगीर ने गुरु हरगोबिंद जी को मुगल शासन की खिलाफत करने पर ग्वालियर किले पर बंदी बनाकर रखा था। मुगल शासन काल में ग्वालियर किले का उपयोग बंदीगृह के रूप में होता था। इसकी बनावट और पहाड़ी पर बने होने के कारण यह काफी सुरक्षित था। यहां से इतिहास में कभी कोई बंदी भाग नहीं सका था।

यह वह जगह है जहां गुरु हरगोबिंद सिंह जी ने बंदी रहते हुए साधना की
यह वह जगह है जहां गुरु हरगोबिंद सिंह जी ने बंदी रहते हुए साधना की

गुरु जी के साथ यहां देश के विभिन्न इलाकों के 52 राजपूत राजा भी बंदी थी। करीब 2 साल 3 महीने तक गुरु हरगोबिंद सिंह यहां रहे। इसके बाद लगातार मुगल बादशाह जहांगीर का स्वास्थ्य खराब रहने लगा। उन्हें सपने में एक फकीर गुरु को रिहा करने का आदेश देते थे। जब जहांगीर ने गुरु जी को रिहा करने का निर्णय लिया तो वह अपने साथ बंदी 52 राजाओं को रिहा करने पर अड़ गए। जहांगीर को पता था यह 52 राजा छोड़ना खतरनाक हो सकता है।

इस पर मुगल सल्तनत ने एक योजना बनाई। ऐलान किया कि बंदी राजाओं में जो गुरु हरगोबिंद के दामन को थामकर बाहर आ सकेंगे उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। इसके लिए गुरु हरगोबिंद साहब ने एक युक्ति निकाली उन्होंने जेल से रिहा होने से पहले नए कपड़े पहनने के नाम पर 52 कलियों का अंगरखा सिलवाया और जब गुरु की रिहाई हुई 52 राजा एक-एक कलियां पकड़कर उनके साथ रिहा हुए। तभी से गुरु हरगोबिंद की सूझबूझ और समझदारी के कारण उनको दाता बंदी छोड़ के नाम से भी जाना जाता है।

100 किलो सोने से 1968 में ग्वालियर में बना था गुरुद्वारा दाताबंदी छोड़
सिखों के सेवादार देवेन्द्र सिंह ने बताया कि साल छठवें गुरु हरगोबिंद सिंह को 1600 ईसवी में ग्वालियर किले पर बंदी बनाकर मुगल शासन काल में रखा गया था। सन 1621 में वह 52 राजाओं को लेकर रिहा हुए थे। वहीं से उनको दाता बंद छोड़ नाम मिला। उनके इस घटनाक्रम और किले पर बंदी रहने के स्मारक के तौर पर संत बाबा अमर सिंह के द्वारा सन 1968 में ग्वालियर किले पर गुरुद्वारे दाता बंदी छोड़ का निर्माण कराया गया। गुरुद्वारा में 100 किलो सोना लगा है। गुरुद्वारा की छत पर 25 फीट पर एक सोने का गुंबद है और चार 14-14 फीट के गुंबद हैं।

400 साल पूरे होने पर मनाया जा रहा है उत्सव
सेवादार देवेन्द्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष दाता बंदी छोड़ की घटना को 400 साल पूरे हो रहे हैं। इसलिए ग्वालियर किला स्थित गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ पर 4 से 6 अक्टूबर के बीच तीन दिवसीय विश्वस्तरीय उत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें देश के साथ विदेश से भी लोग शामिल हो रहे हैं। इसके लिए सारे इंतजाम पूरे किए जा रहे हैं। चार अक्टूबर को प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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