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मैदान नहीं, ये बांध हैं:हाईकोर्ट के आदेश के 2 साल बाद भी बांधाें से नहीं हटे अतिक्रमण

ग्वालियर19 दिन पहले
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रमौआ बांध सिंधिया रियासत ने बनवाया था। इसकी जलभरण क्षमता 1400 करोड़ लीटर (ग्वालियर के लिए लगभग 61 दिन का पानी) है। बारिश में यह बांध पूरा भर जाता है, लेकिन मुरम वाली पथरीली जमीन की तली होने के कारण ये पानी धरती में समा जाता है। - Dainik Bhaskar
रमौआ बांध सिंधिया रियासत ने बनवाया था। इसकी जलभरण क्षमता 1400 करोड़ लीटर (ग्वालियर के लिए लगभग 61 दिन का पानी) है। बारिश में यह बांध पूरा भर जाता है, लेकिन मुरम वाली पथरीली जमीन की तली होने के कारण ये पानी धरती में समा जाता है।
  • बारिश में ये भरते हैं लेकिन लीकेज और खेती के कारण फिर ऐसे मैदान बन जाते हैं

हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच, संभागीय आयुक्त और कलेक्टर ने फरवरी 2019 में 6 बड़े बांधों से अतिक्रमण हटाने के लिए आदेश दिए थे, लेकिन 2 साल 3 महीने बीत जाने के बाद भी ये अतिक्रमण नहीं हटे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा, बांध क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने और कैचमेंट एरिया को साफ करने के आदेश एसडीएम को दिए गए हैं।

ये है बांधों की स्थिति

हनुमान बांध: कैचमेंट एरिया में 180 से ज्यादा मकानों का अतिक्रमण हैं। यहां लोग खेती भी कर रहे हैं।
रायपुर: घाटीगांव ब्लॉक के इस बांध के कैचमेंट की जमीन पर लोग खेती कर रहे हैं।
मामा का ताल: इस बांध के कैचमेंट एरिया में लोगों ने कब्जा कर मकान बना लिए हैं। लोग खेती भी कर रहे हैं।
जड़ेरूआ: सीपी कॉलोनी के पिछले हिस्से में मौजूद इस डैम के कैचमेंट एरिया में मकान बन गए हैं। खेती भी हो रही है।
पारसेन: तालाब के पास संचालित खदान में हो रही ब्लास्टिंग के कारण बांध क्षतिग्रस्त हो चुका है।

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