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  • Three Days Later, The Patient Is Less Than 1000, Infection Rate Is 24.84%, Patients Increased In Rural Area

कोरोना ग्राउंड रिपोर्ट:तीन दिन बाद मरीज 1000 से कम, संक्रमण दर 24.84% रही, ग्रामीण क्षेत्र में बढ़े रोगी

ग्वालियरएक महीने पहलेलेखक: गजराज सिंह यादव
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जेएएच स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बाहर पड़े प्रकाशचंद्र को ऑक्सीजन देती पत्नी और उसका बेटा। - Dainik Bhaskar
जेएएच स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बाहर पड़े प्रकाशचंद्र को ऑक्सीजन देती पत्नी और उसका बेटा।
  • ईटमा में दो की मौत, एकसाथ मिले 61 संक्रमितों के बाद भी लापरवाही

शहर में तीन दिन बाद गुरुवार को कोराेना संक्रमित 1000 से कम मिले। लेकिन संक्रमण दर 24.84 रही। गुरुवार को कोरोना के शहर में 910 संक्रमित मिले। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना की मार जारी है। हॉट स्पाट बने ईटमा गांंव में दिन के बाद फिर लोगों की चहल पहल शुरु हो गई।

गांव में जो लोग संक्रमित निकले थे वे गुरुवार को घर के बाहर टहलते और चबूतरों पर बैठे नजर आए। दूसरी तरफ जो लोग संक्रमित नहीं हैं वे डर के कारण खुद ही अपने घर में बंद हो गए हैं। संक्रमितों का घरों के बाहर घूमना और खुले में चबूतरों पर बैठना घातक साबित हो सकता है। बाबजूद इन्हें न तो कोई रोकने वाला है और न ही टोकने वाला।

यहां 61 लोग संक्रमित पाए गए हैं और दो लोगों की मौत होे चुकी है। गुरुवार को सुबह दैनिक भास्कर संवाददाता जब गांंव के हालात देखने पहुंचा तो सरपंच उमराव सिंह के घर सामने ही कोरोना पॉजीटिव सोबरन सिंह रावत के घर के बाहर चबूतरे पर कई लोग बैठे हुए थे । इनमे से कुछ लोग ऐसे भी थे जो कि खुद भी पॉजीटिव निकले हैं । इसके बाद भी वे घर में रहने की जगह खुले में बेखौफ बैठे थे । गांव की गलियां जो बुधवार को सूनी पड़ी थीं, उनमें खासी चहल-पहल थी। प्रशासन ने जिन संक्रमितों के घरों के बाहर कोरोना संक्रमित होने के पोस्टर चिपकाए थे, उन्हें लोगों ने फाड़कर फेंक दिया था ।

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बाहर ही टूट गईं सांसें

तस्वीर जेएएच परिसर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बाहर की है। गदाईपुरा निवासी प्रकाशचंद्र (50) को चार दिन से बुखार था। उन्होंने प्रायवेट डॉक्टर से इलाज कराया। दवा लेने के बाद भी आराम नहीं मिला तो परिजन गुरुवार को जिला अस्पताल मुरार ले गए। वहां से उन्हें जेएएच भेजा।

जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। डॉक्टर ने उन्हें सुपरस्पेशलिटी अस्पताल रेफर कर दिया। ढाई बजे परिजन जब उन्हें वहां लेकर पहुंचे तो वे मर चुके थे। दरअसल, सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में रोज औसतन 1 से 2 मरीज भर्ती होने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। यानी संक्रमित को इलाज मिलने से पहले ही उसकी मौत हो रही है। इसकी वजह यह है कि मरीज को संक्रमण के लक्षण होने के बाद भी अस्पताल लाने में देरी की जाती है।

इलाज के दौरान 40 की मौत, इनमें 33 ग्वालियर के, 910 नए संक्रमित मिले

जिले में गुरुवार को जहां 910 नए कोरोना संक्रमित मिले, वहीं संक्रमण के शिकार 40 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। इनमें 33लोग ग्वालियर जिले के आैर 7 बाहर के हैं। तीन दिन बाद संक्रमितों की संख्या भले ही एक हजार से नीचे रही हो पर संक्रमण दर 24.86 रही है। स्वस्थ हुए मरीजों की संख्या भी 491 आैर एक्टिव केस 9177 हो गए हैं। संक्रमितों में लक्ष्मण तलैया क्षेत्र के एक ही परिवार के पांच सदस्य, कांग्रेस विधायक के परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में 111 लोग पॉजिटिव निकले

शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में 255 ग्राम पंचायतों में बुधवार को 945 सैंपल लिए गए थे। गुरुवार को आई रिपोर्ट में इनमें से 111 लोेग पॉजिटिव निकले हैं। एक दिन में ग्रामीण क्षेत्र में संक्रमितों की यह सबसे बड़ी संख्या है। संक्रमितों की कुलसंख्या 650 हो गई है।

वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद भी कोरोना की जंग हारे डॉ. एसआर शर्मा

कोरोना वॉरियर और जिला चिकित्सालय मुरार में पदस्थ सर्जन डॉ. एसआर शर्मा (64) का बुधवार रात साढ़े दस बजे निजी अस्पताल में निधन हो गया। ये ग्वालियर का पहला मामला है, जब वैक्सीन का दूसरा डोज लगवाने के बाद भी काेराेना संक्रमण के चलते किसी मरीज की मौत हुई है। डाॅ.शर्मा के बेटे डॉ. तन्मय शर्मा ने बताया कि खांसी की समस्या के चलते पापा ने 23 अप्रैल को जांच कराई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई थी। चेस्ट सीटी की जांच में भी संक्रमण निकला। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हो रहा था, लेकिन बुधवार को स्वास्थ तेजी से बिगड़ा और रात्रि साढ़े दस बजे के लगभग दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। डॉ. शर्मा की सितंबर 2020 में बायपास सर्जरी हुई थी। इसके बाद भी वे संक्रमण की चपेट में आने से पहले अस्पताल में ड्यूटी दे रहे थे।

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