विद्युत समस्या:गली-मोहल्ला, अस्पताल सभी जगह अघोषित बिजली कटौती, लोग परेशान

ग्वालियर3 महीने पहले
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बिजली गुल होने पर जेएएच में एक्सरे के लिए बैठे मरीज एवं परिजन। - Dainik Bhaskar
बिजली गुल होने पर जेएएच में एक्सरे के लिए बैठे मरीज एवं परिजन।
  • ट्री कटिंग से आगे नहीं बढ़ पाता मेंटेनेंस, इसलिए हर मौसम में हो रही बिजली गुल, मंगलवार को जेएएच में गर्मी के बीच एक्सरे के लिए मरीजों को घंटों करना पड़ा इंतजार

शहर में बिजली कटौती कम होने का नाम नहीं ले रही है। गली-मोहल्लों के साथ अस्पतालों में भी गर्मी के माहौल में मंगलवार को एक घंटे बिजली गुल रही। इससे मरीज परेशान होते रहे। जेएएच की ओपीडी में दोपहर 12 बजे लाइट चली गई। इसके बाद ओपीडी में जनरेटर से डॉक्टरों के कमरों में तो बिजली बहाल कर दी गई, लेकिन एक्सरे मशीन नहीं चल पाई।

इससे मरीजों को एक्सरे कराने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। दोपहर 1:10 बजे लाइट आई जिसके बाद एक्सरे शुरू हुए। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरकेएस धाकड़ ने बताया कि बिजली कटौती की उनके पास कोई सूचना नहीं आई थी। आज यहां 4 घंटे कटौती होगी: बुधवार को सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक न्यू कॉलोनी, 1,2,3, मान मंदिर का क्षेत्र, आरामिल, कोरी समाज का दफ्तर के आसपास बिजली गुल रहेगी।

रोज इन क्षेत्रों में गुल होती है बिजली

गोल पहाड़िया, डीडी नगर, आदित्यपुरम, गोले का मंदिर, मेला ग्राउंड, थाटीपुर, सुरेश नगर, विनय नगर, सिटी सेंटर, गोविंदपुरी, पड़ाव, लक्ष्मीबाई कॉलोनी, द्वारिकापुरी कॉलोनी, हुरावली, सिरोल, गुढ़ा आदि ये वे कॉलोनी-मोहल्ले हैं, जहां पर हर दिन ही बिजली गुल होती है। कभी एक घंटा तो कभी दो से तीन घंटे तक बिजली कटाैती हो जाती है। बीती मध्य रात्रि से इन सभी इलाकों में बार-बार बिजली गुल हो रही है।

बिजली कंपनी दावा करती है कि वह हर महीने मेंटेनेंस करा रही है और नियमित लाइन पेट्रोलिंग भी हो रही है। ऐसे में वे क्या कारण हैं कि इसके बाद भी कटौती होना बंद नहीं हो रही है। इसी की पड़ताल की दैनिक भास्कर ने। विषय विशेषज्ञों ने ऐसे 10 प्रमुख कारण बताए, जिनकी वजह से बिजली संकट का सामना आम लोग कर रहे हैं और जिम्मेदार इन बिंदुओं पर अभी तक ध्यान नहीं दे रहे हैं।

भास्कर एक्सपर्ट- पीके तिवारी, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर, बिजली कंपनी

इन 10 कारणों से बिजली हो रही गुल

  • मेंटेनेंस के दौरान ट्री कटिंग पर ही फोकस अधिक रहता है। पर्याप्त संख्या में जंपर रिप्लेसमेंट हो ही नहीं पा रहे हैं, जिसके कारण बारिश और तेज गर्मी के समय जंपर टूटने से फॉल्ट पैदा होते हैं।
  • ट्रांसफॉर्मरों के जो फेस होते हैं, उन पर लोड बैलेंसिंग नहीं किया जा रहा है। देखने में आता है कि किसी एक फेस पर लोड अधिक है तो किसी फेस पर कम लोड है। इसके कारण एफओसी बढ़ती हैं और बिजली गुल होने से लोग परेशान होते हैं।
  • सबसे बड़ी समस्या हैं पिन इंसुलेटर। खासतौर पर टीआईपीएल कंपनी के वे पिन इंसुलेटर जो बारिश और गर्मी में तेजी से पंचर होते हैं और फॉल्ट पैदा करते हैं। इस समय इन्हीं पिन इंसुलेटर के पंचर होने से समस्या पैदा हो रही है। शहर में करीब 60 हजार पिन इंसुलेटर हैं, जिसमें से 10 प्रतिशत पिन इंसुलेटर टीआईपीएल कंपनी के हैं जो खराब क्वालिटी हैं, जिनको समय रहते बदले जाने की जरूरत है।
  • फॉल्ट का विश्लेषण नहीं हो रहा है। किस फीडर पर सबसे अधिक फॉल्ट आए और किस फीडर पर सबसे कम। फॉल्ट आने की वजह क्या हैं। इसका विश्लेषण होना चाहिए, तभी समस्या के समाधान की ओर काम हो पाएगा। अब तो स्काडा भी है, तब भी यह काम नहीं हो पा रहा है। यह गलत है।
  • मेंटेनेंस के लिए एचटी डिवीजन करके एक अलग डिवीजन बना दी है। जिसके कारण मेंटेनेंस से जोन की टीमें पल्ला झाड़ लेती हैं। यह गलत है। सामूहिक टीम बनाकर काम नहीं हो रहा है।
  • जोन के एई-जेई के पास मेंटेनेंस का व्यवस्थित रिकॉर्ड ही नहीं है। जिसके कारण भी टालमटोल का रवैया बना हुआ है।
  • लाइन स्टाफ के भरोसे पेट्रोलिंग और मेंटेनेंस के काम छोड़ दिए गए हैं। एई-जेई लाइन पेट्रोलिंग टीमों के साथ फील्ड में नहीं जा रहे हैं। एई-जेई को लाइन पेट्रोलिंग को लीड करना चाहिए। हमारे जमाने में ऐसे ही काम होता था।
  • सबसे ज्यादा दिक्कत है हर महीने मेंटेनेंस की व्यवस्था को लागू करना। बहुत ही बकवास आइडिया है। हमारे जमाने में प्री मानसून और पोस्ट मानसून मेंटेनेंस ही होता था। बहुत हो गया तो दीपावली से पहले एक मेंटेनेंस शिड्यूल बना लेते थे। इससे एक सीमित समय में बिजली सप्लाई बंद करके मेंटेनेंस पूरा कर लेते थे। लेकिन अब तो ऐसा लगता है कि ये लोग हर दिन ही मेंटेनेंस कर रहे हैं। अब मेंटेनेंस के लिए बिजली सप्लाई बंद करते हैं तो लोग परेशान और उसके बाद भी फॉल्ट हो जाए तो भी बिजली गुल होने से लोग परेशान तो ऐसे में हर महीने मेंटेनेंस की व्यवस्था से क्या फायदा है।
  • मेंटेनेंस करना यदि जरूरी है तो ऐसे समय में करें जब मौसम अच्छा हो। उमस में, गर्मी में मेंटेनेंस के लिए शटडाउन न लें।
  • शहर में लगभग 1100 कर्मचारियों का लाइन स्टाफ है। लेकिन इनमें से नियमित कर्मचारी 50 से 100 ही हैं। शेष सभी आउटसोर्स कर्मचारी हैं। नियमित और प्रशिक्षित लाइन स्टाफ के न होने से भी न तो मेंटेनेंस ठीक से हो पा रहा है न ही लाइन पेट्रोलिंग करके समय रहते खराब उपकरणों को बदलने का काम हो पाता है।

हम पुराने पिन इंसुलेटर बदलवाकर नए लगा रहे हैं

यह बात सही है कि टीआईपीएल कंपनी के पिन इंसुलेटर फॉल्ट होने की बड़ी वजह बन चुके हैं। इसलिए हम लोग हर दिन 100 से 300 तक पिन इंसुलेटर बदलवा रहे हैं। इनके स्थान पर डेक्कन कंपनी के पिन इंसुलेटर लगा रहे हैं। लेकिन सभी को बदलने में समय तो लगेगा। लाइन पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जिससे फॉल्ट होने से पहले ही खराब उपकरणों को बदला जा सके।
-नितिन मांगलिक, महाप्रबंधक, ग्वालियर सिटी सर्किल, बिजली कंपनी

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