जिंदगी की आखिरी चुनाव ड्यूटी...:मतपेटियां जमा कर पत्नी, बच्चों के पास लौट रहा था शिक्षक, तेज रफ्तार वाहन ने कुचला, मौत

ग्वालियर5 महीने पहले
  • उटीला के द्वारिकागंज मोड़ पर हुआ हादसा

एक शिक्षक के लिए यह चुनाव ड्यूटी जिंदगी की आखिरी चुनाव ड्यूटी बन गई। रात 3 बजे घाटीगांव में पंचायत चुनाव के लिए मतदान और मतगणना कर लौटे शिक्षक ने मतपेटियां जमा कराईं। इसके बाद हस्तिनापुर औड़े का पुरा के लिए दोपहिया वाहन उठाकर निकल पड़ा। उसे बच्चों से मिलने की जल्दी थी, क्योंकि 48 घंटे से भी ज्यादा समय से बाहर था।

अभी वह उटीला के द्वारिकागंज मोड़ पर पहुंचा ही था कि एक तेज रफ्तार वाहन उसे रौंदकर निकल गया। शिक्षक ने वहीं तड़पते हुए दम तोड़ दिया। घटना की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को निगरानी में लिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर टक्कर मारने वाले वाहन की तलाश शुरू कर दी है।
पति का इंतजार कर रही थी पत्नी, आई मौत की खबर
हस्तिनापुर के औड़े का पुरा निवासी 40 वर्षीय प्रेमनारायण पुत्र हरिकिशन जाटव शिक्षक थे। अभी वह औड़े का पुरा शासकीय प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ थे। शनिवार को पंचायत चुनाव में प्रेम नारायण की भी ड्यूटी लगाई गई थी। उनको घाटीगांव के नयागांव में चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। जिसके लिए वह शुक्रवार सुबह से ही निकल गए थे। मतपेटियां लेकर दलों को मतदान केन्द्र के लिए रवाना किया गया था। प्रेम नारायण ने रविवार तड़के 3 से 4 बजे के बीच पॉलिटेक्निक कॉलेज में मतपेटियां जमा कीं। इसके बाद वह घर के लिए निकले। चौहान प्याऊ थाटीपुर रहने वाले अपने भाई से गाड़ी मंगाई। गाड़ी लेकर वह अपने घर औड़े का पुरा के लिए रवाना हुए थे। उटीला इलाके में वह द्वारिकागंज मोड़ पर पहुंचे ही थे कि अभी किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें रौंद दिया। टक्कर मारने वाले वाहन ने इतनी बुरी तरह कुचला था कि शिक्षक की मौके पर ही मौत हो गई। वह सड़क पर मृत पड़ा था और घर पर पत्नी उसके लौटने का इंतजार कर रही थी। घटना से कुछ देर पहले प्रेमनारायण ने जल्दी घर आने के लिए कहा था, लेकिन वो घर नहीं पहुंचा। सुबह उसके मौत की खबर घर पहुंची है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजन के सुपुर्द कर दिया है।
दो साल पहले हो चुकी है बेटे की मौत
- बताया गया है कि प्रेम नारायण के तीन बेटियां, एक बेटा था। पर दो साल पहले करीब 12 साल के बेटे की अचानक मौत हो गई थी। अब उसके पास तीन बेटियां थीं। पत्नी, बेटियों की जिम्मेदारी उस पर ही थी। घर में वहीं अकेला कमाने वाला था। अन्य भाई अलग रहते हैं। अब उसके इस तरह जाने से परिवार पर आर्थिक संकट भी गहरा गया है
मौत के लिए प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
- शिक्षक की इस तरह मौत के लिए अजाक विकास संघ ग्वालियर के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण जाटव ने आरोप लगाया है कि इस मौत के लिए मतदान के बाद वहीं मतगणना कराने की हठधर्मिता है। यदि ऐसा न होता तो शिक्षक की जान बच सकती थी।

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