जीआरपी के स्थापना दिवस पर महिला यात्रियों ने कहा:सुरक्षित सफर के लिए ट्रेनों में भी महिला आरक्षकों की तैनाती हो

ग्वालियर16 दिन पहले
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जीआरपी की स्थापना को 55 साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर रेलयात्री सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया गया। शुक्रवार को इसका समापन था। जीआरपी के टीआई बलराम यादव ने बताया कि सात दिन चले इस कार्यक्रम में हर दिन अलग-अलग तरह के अभियान चलाए गए। ट्रेनों में भी जीआरपी के जवानों ने सफर कर यात्रियों से फीडबैक लिया।

इस दौरान महिला यात्रियों ने कहा कि रनिंग ट्रेन में महिला आरक्षकों को उनकी मदद के लिए तैनात किया जाना चाहिए। वहीं सीनियर सिटीजन का कहना था कि पहले की तरह रियायत टिकट मिलना चाहिए। इस पर जीआरपी ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस तरह की छूट रेलवे द्वारा ही दी जाएगी।

वहीं टीआई यादव का कहना था कि जीआरपी एमपी हेल्प एपल की मदद से यात्री चलती ट्रेन में एसओएस पर क्लिक कर कंट्रोल को सूचना दे सकते हैं। इसके बाद कंट्रोल द्वारा यात्री से बात कर ट्रेन में क्विक रिस्पांस टीम को भेजा जाएगा और तुरंत एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं। साथ ही एमपी ई-कॉप एप की मदद से 1 लाख से कम नगद कैश तक की चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं। ज्ञात रहे जीआरपी की स्थापना देश की आजादी से पहले 1 जनवरी 1867 को हुई थी।

महिला आरक्षक यात्रियों से जानेंगी परेशानी

  • पूरे प्रदेश में जीआरपी में 35 महिला आरक्षक हैं। ऐसे में रोज ट्रेनों में महिला आरक्षकों की ड्यूटी नहीं लगा सकते, लेकिन कभी-कभी जीआरपी के जवानों के साथ महिला आरक्षक रनिंग ट्रेनों में जाएंगी और महिला यात्रियों की परेशानी को जानेंगी। - एमएस सिकरवार, आईजी, जीआरपी
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