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  • The People Of Raghunathpur, Who Were In The Discussion About The Infected In The First Wave, Were Focused On Increasing Immunity In The Second Wave.

सतर्कता जरूरी:पहली लहर में संक्रमितों को ले चर्चा में रहे रघुनाथपुर के लोगों का दूसरी लहर में इम्यूनिटी बढ़ाने पर रहा ध्यान

रघुनाथपुर21 दिन पहले
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  • कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए ग्रामीणों ने खुद को किया सचेत, बाहरी खाने पर नहीं रहा लोगों का जोर

कोरोना महामारी के दौरान जिले में रघुनाथपुर प्रथम पायदान पर खूब छाया रहा। बीते वर्ष भी प्रखंड का रिकॉर्ड शुरुआती दौर में देश के अंदर काफी चर्चा में रहा था। उस दौरान तो मरीजों की संख्या उतनी नहीं रही। परंतु 2021 की लहर में मरीजों की संख्या अप्रैल माह के मध्य से खूब दिखा।

इस माह के अंत होते-होते 700 की संख्या को पार कर गया। पिछले साल मौतों का सिलसिला तो नहीं रहा। इस दौरान फल मंडियों की सबसे अधिक चांदी रही। लोगों ने सबसे अधिक विटामिन सी युक्त फलों को खाने तथा उसके जूस पीने पर अपना अधिक ध्यान रखा।

टारी बाजार के एक छोटे फल दुकानदार सुरेश भगत का कहना था। उनके यहां हर रोज 50 पीस किवी, पपीता 25 किलो ,संतरा 30 किलो, मौसम्मी जूस 30 ग्लास, कागजी नींबू 100 पिस तक बिक जाते थे। दो-चार दिन से अब कम हुई है। प्रखंड में लगभग तीन बाजार हैं। चकरी टारी तथा मुख्यालय। टारी बाजार में चार,चकरी बाजार में तीन, रघुनाथपुर में आठ, दुकान ऐसे फलो की बिक्री करने वाले मौजूद है।

रघुनाथपुर के फल दुकानदार दीपक चौरसिया, पिंटू ,सत्येंद्र का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान दुकानों को खोलने का समय तो कम ही मिला ।परंतु पॉजिटिव रोगियों के परिजनों द्वारा फलों की खेप हर रोज घर को ले जाया जाता था। लोगों ने हर रोज नारियल डॉभ, संतरा ,मौसमी के जूस लोगों ने पीना जारी रखा। दुकानदारों के आकलन के मुताबिक 15 अप्रैल से 15 मई के बीच तक लगभग 25 हजार पीस किवी फल जो खून में प्लेटलेट्स की मात्रा कायम रखता है, को लोगों ने खूब खाया।

इसबार होम आइसोलेशन में इलाज करानेवालों की संख्या ज्यादा
इस साल जहां पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई ‌। साथ ही साथ मौतों का आंकड़ा भी जारी रहा। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक प्रखंड में लगभग एक दर्जन से ऊपर लोगों की मौत हो चुकी है। अगर गांव के अंदर कोरोना जैसे लक्षण प्रतीत होने के बाद सांस फूलने, हार्ड अटैक, सहित अन्य आंकड़ों पर गौर करें तो सैकड़ों लोगों की मौत केवल अप्रैल तथा मई माह मे हुई। इस दौरान जांच के बाद पॉजिटिव आने के साथ ही होम आइसोलेशन में रहने वालो की संख्या अधिक रही। गांव बाजारों के प्राइवेट क्लीनिक पर रोगियों की भरमार रही। हालांकि उन्हें सबसे अधिक टाइफाइड से ग्रसित होने की बात कह चौक- चौराहे बाजारों के घरेलू डॉक्टरों ने भी इलाज जारी रखा।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को लेकर नींबू ने दिखाया जलवा
नींबू को हाथ में लगाना, नाक में डालना, नींबू का रस पीना ,नींबू को सब्जी दाल में डालकर खाना, जैसे कार्य में हर घर रोज कम से कम पांच दस नींबू की खपत हो जाती थी। हालांकि पिछले एक हफ्ते से महामारी पर अंकुश लगा है। लोगों ने अब फल का सेवन कम करना शुरू कर दिया है। दुकानदारों का कहना था। फलों के बिक्री पर 50% की कमी आई है। यह आंकड़े केवल करोना मरीजों तथा उसके जैसे लक्षण प्रतीत होने वाले गांव के अन्य मरीजों के द्वारा सेवन किए गए।

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