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प्रशासन की राहत का इंतजार:शहर से गांवों तक बाढ़ग्रस्त लोग खुद ही कर रहे जरूरतमंदों को भाेजन और कपड़ों की व्यवस्था

श्याेपुुर3 महीने पहले
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  • समाज संगठनों ने लगाए जगह जगह लंगर,समाजसेवियों ने घर-घर जाकर बांटे पुड़ी-सब्जी

जिले में इस सदी की सबसे विनाशक बाढ़ में सैकड़ाें घर-गृहस्थी उजड़ने के बाद अब भूख संकट से जूझ रहे लाेगाें पर सरकारी सिस्टम की नाकामी भारी पड़ रही है। शुक्रवार से भारी बारिश का दाैर थमने से जहां मौैसम ने जिलावासियों काे राहत दी है, वहीं जगह-जगह सड़कें, पुल और पुलिया टूटने के कारण शनिवार को पांचवें दिन भी बाढ़ से बेहाल इलाकों में प्रशासन की टीम नदारद रही। घर गृहस्थी बर्बाद होने से खुले आसमान के नीचे भूख से संघर्ष कर रहे पीड़ित परिवारों को प्रशासन की राहत का इंतजार है। इस बीच शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में खुद बाढ़ पीड़ित ही अपने स्तर पर चंदा जुटाकर जरूरतमंद परिवारों को खाने के लिए भोजन और पहनने के लिए नए-पुराने कपड़े उपलब्ध करा रहे है। शहर से गांवों तक आपदा के मारे लोगों की मदद का जज्बा समाजसेवियों ने दिखाया है। कई समाज संगठनों ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में जगह-जगह भोजन के लंगर लगाए है। प्रभावित लोगों के लिए सुबह नाश्ते में कचोरी, पकौड़ी और बिस्किट के पैकेट बांटे गए। पूड़ी-सब्जी,कढ़ी-चावल सहित खाने के पैकेट दोनों टाइम घर-घर जाकर बांटने के काम मे उत्साही युवा जुटे हुए है।

खास बात यह है कि संकट के इस वक्त में जब बारिश से बिगड़े रास्तों का हवाला देकर प्रशासनिक अमला बेबसी जता रहा है,लेकिन दुर्गम रास्तों को चीरते हुए पडौसी जिले बारां और सबलगढ़ से ट्रक और मेटाडोर में भरकर राशन सामग्री बड़ौदा और मानपुर पहुंची है। बारां और सबलगढ़ से आए मुस्लिम समाज के लोग तथा व्यापारियों की ओर से ग्रामवासियों को आटा, दाल, तेल,नमक,मसाले, साबुन आदि राशन सामग्री बांटी गई। श्योपुर के सामाजिक और धार्मिक संगठन भी पीडितों की मदद को आगे आए है।

बाढ़ पीडितों के हालातों को देखते हुए धार्मिक यात्राओं के लिए जुटाई गई धनराशि भी भूखों को भोजन और कपड़ों पर खर्च करने का निर्णय लिया गया है। बाढ़ से बेघर परिवारों के लिए भोजन बनाने के काम में तमाम हलवाई निशुल्क सेवाएं देने के साथ ही गली मोहल्लों की महिलाएं और बच्चे भी पूड़ी बेलने से लेकर पैकेट बनाने में दिनरात सहयोग कर रहे है।

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