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  • In The Revolt Of 1857, Along With Rani Laxmibai, Many Brave Women Had Sacrificed Their Lives To Protect The Motherland: Ram Niwas

बलिदान दिवस:1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई के साथ कई वीरांगनाओं ने मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किए थे: रामनिवास

श्याेपुरएक महीने पहले
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लक्ष्मीबाई को नमन करते। - Dainik Bhaskar
लक्ष्मीबाई को नमन करते।
  • बलिदान दिवस पर शहर व अंचल में याद की गईं वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई
  • विजयपुर मेंं ब्लाॅक कांग्रेस कमेटी ले श्रद्धांजलि सभा का किया आयोजन

शहर समेत जिलेभर में शुक्रवार काे वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, झलकारीबाई व उनकी सहेलियों का बलिदान दिवस श्रद्धा से मनाया। विजयपुर मेंं ब्लाॅक कांग्रेस कमेटी की अाेर से श्रद्धांजलि सभा रखी गई। जिसमें कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लड़ते हुए 17 जून 1857 को मातृभूमि की रक्षा के िलए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसमें उनकी हमशक्ल एवं प्रिय सहेली झलकारीबाई सहित कई सहेलियां वीरगति को प्राप्त हो गई थीं।

इस माैके पर पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा ने वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथ का बखान किया। अल्पसंख्यक कांग्रेस के ब्लाॅक अध्यक्ष अामिर खान सहित कई कार्यकर्ता माैजूद रहे। इधर शहर में जिला कांग्रेस अध्यक्ष अतुल चाैहान ने बलिदान दिवस पर रानी लक्ष्मीबाई काे श्रद्धासुमन अर्पित किए।

बड़ाैदा में भी श्रद्धांजलि सभा हुई। जिसमें कांग्रेस नेता रितेश ताेमर ने रानी लक्ष्मीबाई के शाैर्य काे याद किया। साेशल मीडिया पर भी लाेगाें ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई काे भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई सच्चे अर्थों में भारतीय स्वराज के विचार और कार्य रूप को सुस्थापित करने वाली महान योद्धा थी। आज की महिलाएं उनके व्यक्तित्व से प्रबंधन, आत्म कौशल, प्रशासन, तनाव प्रबंधन और उत्कर्ष के गुर सीख सकती है। क्योंकि रानी का अनुकरणीय जीवन दोहरी ,तिहरी जिम्मेदारियों के बीच निर्मित था इसलिए पारिवारिक माहौल में भी हमें उनके जीवन से प्रेरणा ले सकते है।

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