प्रदूषण:पटाखे व पराली जलाने से शहर से गांव तक‎ हवा में प्रदूषण, एक्यूआई लेवल 163 पर‎

श्योपुर‎एक महीने पहले
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  • जंगल से घिरे श्योपुर में आबोहवा दूषित, पिछले साल से 13 एक्यूआई बढ़ा प्रदूषण का स्तर‎

पटाखे चलाने और ग्रामीण इलाकों‎ में किसानों द्वारा जलाई जा रही‎ धान की पराली से श्योपुर की‎ आबोहवा दूषित में प्रदूषण फैल‎ गया। विशेषज्ञों की मानें तो प्रदूषण‎ का लेवल स्वास्थ्य के लिए‎हानिकारक होता जा रहा है। यहां‎ हालात तब हैं जब श्योपुर जिला‎ चारों ओर से जंगल से घिरा हुआ‎ है। ऐसे में सावधानियां नहीं बरतना‎ लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।‎

शनिवार को प्रदूषण का लेवल‎ 163 एक्यूआई दर्ज किया गया।‎ इसी के साथ फेंफड़ों को नुकसान‎ पहुंचाने वाले महीन कण यानी‎ पीएम 2.5 की औसत सांद्रता‎ शनिवार को 78.2 माइक्रोग्राम प्रति‎ घन मीटर तक पहुंच गई। जबकि‎ इसकी सुरक्षित दर 60 मानी जाती‎ है। जिले में दीपावली, धनतेरस‎ और दाैज के दिन पर हुई आतिश‎ बाजी और धानी की पराली और‎ ईंट के भट्‌टों से उठने वाले धुंए के‎ कारण शहर की एयर क्वालिटी‎ इंडेक्स (एक् ूआई) पहली बार‎ 160 के पार करते हुए 163 पर‎ पहुंचा है। विशेषज्ञों के मुताबिक‎ एक्यूआई 100 से नीचे ही बेहतर‎ होता है। जबकि 101 से 150 तक‎एक्यूआई लेवल संवे नशील माना‎ जाता है। यह सबसे ज्यादा बुजुर्गों,‎ बच्चों और अस्थमा रोगियों के लिए ‎नुकसान देय है। जबकि एक्यूआई‎ का लेवल इसके ऊपर जाना चिंता‎ का सबब माना जाता है।‎

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