चिंताएं / फाइलों में दम तोड़ गया 10.80 करोड़ रुपए का नाला डायवर्ट प्लान

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  • लोग बोले- नालों का गहरीकरण एवं सफाई नही हुई तो 20 हजार आबादी को होगी मुसीबत

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

श्योपुर. तीन तरफ से नालों से घिरे बड़ौदा कस्बे में नाले डायवर्ट करने की योजना चार साल से फाइलों में ही दम तोड़ चुकी है। मानसून सीजन नजदीक आते ही कस्बे की 20 हजार आबादी की चिंताएं बढ़ने लगी है। कस्बे के लोगों ने एक सामूहिक आवेदन नगर पंचायत सीएमओ को देते हुए समय रहते अतिक्रमण और मलबे से अटे नालों की सुध लेने की याद दिलाई है। कस्बे के जनप्रतिनिधि और जागरूक लोगों ने आवेदन देते हुए कहा कि यदि समय रहते नगरीय प्रशासन नहीं चेता तो बरसात के सीजन में नाले बेकाबू होकर कस्बे को डुबोंएंगे। इस दौरान पिछले साल नालों में उफान आने पर कस्बे में जलभराव के हालात की तस्वीरें भी दिखाई । इस आशय के आवेदन की प्रति कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को भी भेजी गई है। 

तहसील मुख्यालय बड़ौदा कस्बा भौगोलिक रूप से तीन तरफ से नालों से घिरा हुआ है। बरसों पुरानी डूब की इस समस्या के निदान के लिए तीनों नालों को ऊंडा खाड़ नाले में डायवर्ट करने की योजना सात साल से शासन से बजट नहीं मिलने के कारण फाइलों में दबकर रह गई है। वर्ष 2014 में तत्कालीन सांसद अनूप मिश्रा की घोषणा पर जल संसाधन विभाग ने तीनों नाले ऊंडा खाड़ में डायवर्ट की योजना तैयार की थी। 

इसके लिए 10.80 करोड रुपए का एस्टीमेट बनाकर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा था। लेकिन बजट को मंजूरी के इंतजार में ही तत्कालीन सांसद का कार्यकाल खत्म हो गया। गुजरे सालों में जनप्रतिनिधि शासन से एक पैसा मंजूर नहीं करा सके। नालों के दोनों तरफ अवैध से अतिक्रमण कर सैकड़ा मकान-दुकान बन गए हैं।  बड़ौदावासियों को हर साल मानसून सीजन में जूझना पड़ता है।

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