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  • After 7 Years, In October The Mercury Increased Instead Of Decreasing, A Difference Of 13 Degrees In Day And Night Mercury

मौसम:7 साल बाद अक्टूबर में दिन का पारा घटने के बजाए बढ़ा, दिन-रात के पारा में 13 डिग्री का अंतर

श्योपुर8 महीने पहले
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बादल छाने के बाद कुछ ऐसा रहा शहर का नजारा। - Dainik Bhaskar
बादल छाने के बाद कुछ ऐसा रहा शहर का नजारा।
  • बंगाल की खाड़ी से बने सिस्टम से आया बदलाव, दिनभर छाए बादल से दिन का पारा दाे डिग्री बढ़ा

अक्टूबर माह में अधिकतम तापमान गिरने के बजाए बढ़ता जा रहा है। इससे न सिर्फ फसलों की बोवनी पर असर पड़ रहा है बल्कि, गर्मी व उमस भी लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग की मानें तो 7 साल बाद अक्टूबर माह में ऐसा हो रहा है। रात-दिन के पारा में 13 डिग्री का अंतर है।

2013 में अक्टूबर माह में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री के बीच था, क्योंकि तब भी शुष्क हवा के चलते अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी हो रही थी। सात साल के बाद फिर से वही मौसम देखने को मिल रहा है। इस बार बंगाल की खाड़ी से बने सिस्टम और उत्तरी-पश्चिमी हवा का दबाव कम होने के साथ ही राजस्थान की ओर से शुष्क हवा चल रही है। इसके कारण अब उमस और गर्मी तेजी से बढ़ रही है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो 10 अक्टूबर के बाद से ही मौसम में बदलाव आना शुरू होने के साथ अधिकतम तापमान में गिरावट शुरू हो जाती है और ऐसे में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास आ जाता है।

लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। यहां तापमान घटने के बजाए लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके चलते दिन-रात के तापमान में भी काफी अंतर आ गया है। बुधवार को अधिकतम तापमान 2 डिग्री बढ़कर 34 डिग्री मापा गया। इसी तरह न्यूनतम तापमान में भी एक डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो कि 21 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। यहां दिन-रात के पारे में भी 13 डिग्री का अंतर आ गया है। लगातार बढ़ते पारे के बीच मौसम विभाग का कहना है कि इस बार सर्दी का दौर भी दिन में देरी से शुरू हो पाएगा।

मिट्टी की नमी खत्म, बोवनी पर भी असर
उमस व गर्मी बढ़ने से खेतों में मिट्टी की नमी खत्म हो जाएगी और किसान इसके चलते पलेवा नही कर पाएंगे। क्योंकि पलेवा के लिए उन्हें खेतों में नमी चाहिए। इसे लेकर नहर में पानी तो छोड़ दिया गया है, लेकिन यह पानी अभी देरी से श्योपुर पहुंचेगा। इससे खेतों में इस बार गेहूं, सरसों व चना सहित अन्य फसलों की बोवनी में देरी होगी और किसानों को बोवनी में देरी होने के कारण उत्पादन पर इसका असर पड़ेगा। साथ ही रोग की संभावना भी बढ़ जाएगी।

इस मौसम से बढ़ेंगे बुखार-खांसी के रोग
मौसम में रोजाना आ रहे इस बदलाव को लेकर सिविल सर्जन डॉ. आरबी गोयल का कहना है कि इससे शरीर में काफी बदलाव होते है। ऐसे में बीमारी से बचने के लिए लोगों को ताजा पानी व ताजा भोजन करना चाहिए। रात के समय में भोजन की मात्रा कम करनी चाहिए। इसके अलावा हेल्दी फूड खाना चाहिए। जिससे उनका इम्युनिटी पावर बढ़े। मौसम में आए बदलाव से बुखार व सर्दी-खांसी की बीमारी ज्यादा होती है।

आगे क्या: सिस्टम बनने से बारिश होने के आसार
बंगाल की खाड़ी से सिस्टम बनने के चलते अब मावठे की उम्मीद मौसम विभाग जता रहा है। अगर ऐसा रहा तो वायरल फीवर जैसी समस्या और बढ़ जाएगी। आगामी तीन-चार दिनों तक दिन में गर्मी और रात में सर्दी का अहसास रहेगा। क्योंकि सिस्टम बनने के बाद हवा शुष्क हो चुकी है और उत्तरी-पश्चिमी हवा का दबाव भी कम हो गया है। इससे रात-दिन के पारे में काफी अंतर आ गया है।

मौसम में बदलाव सिस्टम सक्रिय होने का असर
बंगाल की खाड़ी से सिस्टम बनने के कारण मौसम में बदलाव आया है। वर्तमान में उत्तरी-पश्चिमी हवा का दबाव भी कम हो गया है। ऐसे में उमस व गर्मी बढ़ रही है। आगामी कुछ दिनों तक फिलहाल मौसम में यही स्थिति बनी रहेगी।
गुरुदत्त मिश्रा, विशेषज्ञ, मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल

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