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सीप नदी को साफ करने की कवायद:सीप नदी में सीधे नहीं जाए नालों का गंदा पानी, 10.45 करोड़ से वाटर ट्रीटमेंट करने की तैयारी

श्योपुर2 दिन पहले
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  • नपा ने 5 साल पुराने प्रोजेक्ट के लिए शासन से मांगे 10.45 करोड़ रुपए

सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते शहर समेत जिले के सवा साै गांव के लिए जीवनदायिनी सीप नदी मैली हो गई है। शहर से निकलने वाले 18 गंदे नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं। रोज कई टन कचरा और सीवर युक्त गंदा पानी नदी में समा रहा है।

नतीजा, बंजारा डैम के डाउन स्ट्रीम में सीप नदी में प्लास्टिक कचरा ही दिखता है। करीब 75 किलोमीटर लंबे दायरे में बहने वाली सीप नदी की सबसे ज्यादा दुर्दशा श्योपुर शहर में हाे रही है। अब सीप नदी के शुद्धिकरण की याेजना के तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्राेजेक्ट काे धरातल पर उतारने की नगर पालिका प्रशासन ने फिर कवायद शुरू की है। करीब 5 साल से फाइलाें में दबे इस प्राेजेक्ट के तहत नपा ने गंदे नालाें का पानी के ट्रीटमेंट के लिए भाेपाल की कंपनी से डीपीआर बनवाकर शासन काे मंजूरी के लिए भेजी है और शासन से 10 कराेड़ 45 लाख रुपए की मांग की है।

नदी इतना गंदा पानी कि हाथ धोने लायक भी नहीं

श्याेपुर शहर तीन तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। शहर के दाे किमी दायरे में बहने वाली सीप नदी की धारा अक्टूबर में ही थम गई थी। वर्तमान में बंजारा डैम की डाउन स्ट्रीम में नदी की सतह पर प्लास्टिक कचरे की मोटी परत छा गई है। जनवरी आते ही पानी का रंग काला पड़ने के साथ ही सड़ांध मारने लगा है। सितंबर से ही लाेगाें ने नहाना धाेना बंद कर रखा है। शहर में सीप नदी किनारे बने पक्के घाट सूने पड़े हैं।

सीप नदी को साफ रखने के लिए दूसरी बार बनी है कार्ययोजना

सीप नदी के शुद्धिकरण के लिए शहर की 80 हजार आबादी के लाेग वर्ष 2011 से लगातार मांग करते आ रहे हैं। इसमें नगरपालिका परिषद ने पहली बार फरवरी 2016 में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव शासन को भेजा था। उस वक्त नपा ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर 50 लाख रुपए की लागत का अनुमान लगाया गया था लेकिन शासन से पैसा नहीं मिला।

करीब 59 महीने के अंतराल के बाद नगरपालिका ने दूसरी बार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए डीपीआर बनाकर शासन काे प्रस्ताव भेजा है। डीपीआर के मुताबिक इस प्राेजेक्ट पर 10.45 कराेड़ रुपए खर्च आएगा। नपा इंजीनियर एनके गुप्ता के अनुसार वाटर ट्रीटमेंट के लिए शहर के सभी 18 गंदे नालों को एकजाई कर पानी को फिल्टर कर नदी में छोड़ा जाएगा।

ये हैं सीप नदी में गंदगी बढ़ाने के मुख्य कारण

खुले में पड़ा कचरा: श्योपुर शहर के 23 वार्डों से प्रतिदिन 20 ट्रैक्टर ट्रॉली कचरा निकलता है। इसमें से 16 ट्रॉली कचरा तो ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंच जाता है लेकिन बाकी कचरा खुले में पड़ा रहता है। खुले में फेंका जा रहा कचरा नाली व नाले से होते हुए नदी में गिरता है।

ड्रेनेज सिस्टम की खामी: शहर का ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं है। सीवरेज का अभाव है। घरों से निकलने वाली छोटी बड़ी नालियां चैनेलाइज नहीं हैं। शहरभर की नालियों को बरसाती नालों में मिला दिया गया है। इसलिए सारी गंदगी नदी में जाकर गिरती है और पानी दूषित हो रहा है।

किनारे पर बसी रिहायशी बस्तियां: शहर में ऐतिहासिक किले से लेकर कमालखेड़ी तक करीब दाे किलोमीटर में सीप नदी के किनारे पर रिहायशी बस्तियां बस गईं। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे खाली जमीन पर अनियाेजित बसाहट काे समय रहते रोकने का प्रयास नहीं किया, न ही इन बस्तियाें के लिए कोई ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया गया। ऐसे में हजाराें घराें से निकलने वाली गंदगी सीधी सीप नदी में जाती है।

भू-जलस्तर बढ़ाने में सीप की अहम भूमिका

कराहल के जंगल में ग्राम पनवाड़ा से निकली सीप नदी करीब 75 किलोमीटर लंबे दायरे में बहते हुए रामेश्वर धाम पर चंबल और बनास नदियों में मिलकर त्रिवेणी संगम का पवित्र संयाेग बनाती है। शहर सहित नदी किनारे बसे लगभग 125 गांव में लाेगाें की निस्तारी जरूरतों की पूर्ति के साथ ही भू-जलस्तर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।

स्वीकृति मिलने की उम्मीद

सीप नदी में गिरते गंदे नालों पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट नए सिरे से तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। शासन स्तर पर शीघ्र स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।

-मिनी अग्रवाल, सीएमओ, नपा श्योपुर

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